19 साल से आडवाणी-राजनाथ पर नहीं है मोदी को भरोसा, जानिये क्या है वजह…..

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गांधीनगर। सबका साथ सबका विकास का नारा देकर देश की सत्ता में काबिज हुई बीजेपी अपनी ही पार्टी में इस नारे की धज्जियाँ उड़ा रही है।विरोधी दल अक्सर बीजेपी को पीएम मोदी और अमित शाह की प्राइवेट लिमिटेड पार्टी बताते रहते हैं। इस बात की तस्दीक गुजरात चुनाव में प्रचारकों की लिस्ट में न शामिल किये गए दो वरिष्ठ बीजेपी नेताओ के नामों के चलते भी होती हुई नज़र आ रही है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवानी और राजनाथ सिंह दोनों को गुजरात चुनाव प्रचार में जगह नहीं दी गयी है। हैरत तो इस बात की है की आडवानी गुजरात की गांधीनगर सीट से 19 बार से सांसद हैं इसके बावजूद उन्हें गुजरात चुनावो से पूरी तरेह नज़रंदाज़ कर दिया गया है। ऐसा ही कुछ राजनाथ सिंह के साथ भी किया गया है प्रचारकों की लिस्ट में राजनाथ और जोशी से भी परहेज़ किया गया है।

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7 दिसम्बर को ख़त्म होगा प्रचार       

गुजरात के विधानसभा चुनावों में पहले दौर की वोटिंग के लिए 7 दिसम्बर को प्रचार थम जाएगा पहले दौर के लिए 9 दिसम्बर को मतदान होगा। इसके बावजूद अभी तक स्टार प्रचारकों के रूप में राजनाथ और आडवानी दूर-दूर तक नहीं नज़र आ रहे हैं।

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चुनाव प्रचार से दूर किये गए आडवानी  

बीजेपी के संस्थापक सदस्य और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी गुजरात विधानसभा चुनाव में नजर नहीं आ रहे। ऐसा पहली बार हो रहा है जब आडवाणी अपने राजनीतिक जीवन में गुजरात विधानसभा चुनाव से दूर हैं। वो गांधीनगर लोकसभा सीट से पिछले 19 साल से सांसद हैंइसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है। जिस रथ यात्रा पर सवार होकर बीजेपी 2014 में सत्ता के शिखर तक पहुंची हैउसे भी आडवाणी ने 1990 में निकाला थाऔर इसकी शुरुआत भी सोमनाथ से हुई थी। ऐसे में चुनाव से उनकी दूरी चर्चा बनी हुई है।

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यूं तो बीजेपी के स्टार प्रचारकों की सूची में आडवाणी का नाम हैलेकिन प्रचार के लिए उनके किसी कार्यक्रम का अता-पता नहीं है। बीजेपी ने चुनाव आयोग को पहले दौर के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की जो सूची भेजी है उसमें आडवाणी का भी नाम शामिल है। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया कि कोई यह न कह सके कि आडवाणी को पार्टी ने चुनाव प्रचार से जान-बूझकर दूर रखा है। स्टार प्रचारकों में शामिल कर मोदी-शाह की जोड़ी ने चाल चलकर गेंद आडवाणी के पाले में डाल दी है। लेकिनमार्गदर्शक मंडल के दूसरे नेता मुरली मनोहर जोशी का तो सूची में नाम तक नहीं है। इतना ही गुजरात चुनाव में राजनाथ कहीं नजर नहीं आ रहेवहीं जबकि मोदी कैबिनेट के कई मंत्री प्रचार में जुटे हुए हैं।

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