मोदी के खिलाफ वाराणसी से अखिलेश नहीं लड़ेंगे चुनाव, ये है बड़ी वजह..

वाराणसी
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वाराणसी। लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और विपक्षी दलों की अपनी-अपनी रणनीति तैयार शुरू कर दी है। वहीं पीएम मोदी को उनके ही संसदीय क्षेत्र में घेरने की तैयारी हो रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तो यहां तक कह चुके हैं कि मोदी को उनके ही गढ़ में हराना कोई मुश्किल नहीं नहीं होगा। अगर सभी विपक्षी दल एकजुट हो जायें जिसके बाद खबरें ये भी रहीं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं और सपा-बसपा के नेता भी यही चाहते हैं लेकिन अखिलेश का यहां से चुनाव लड़ना बेहद मुश्किल है इसके पीछे की आज हम आपको वजह बतायेंगे।

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वाराणसी से चुनाव न लड़ने की पहली वजह

यूपी के विधानपरिषद से अखिलेश की इसी महीने सदस्यता ख़त्म होने जा रही है। वहीं अखिलेश कह चुके हैं कि वे एमएलसी का चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं। उनके इस बयान से साफ़ हटा है कि वह लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। अखिलेश अपनी पार्टी के नेतृत्व करने वाले नेता हैं। इसलिए उन्हें किसी सदन की सदस्यता हासिल करनी जरुरी है। इसलिए वह ऐसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। जहां उन्हें कोई टक्कर न दे सके कहा यह भी जा रहा है कि अखिलेश कन्नौज या मैनपुरी से चुनाव लड़ सकते हैं कन्नौज अखिलेश का संसदीय क्षेत्र भी रहा है।

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वाराणसी से चुनाव न लड़ने की दूसरी वजह

यूपी में गठबंधन के बाद सपा-बसपा के नेताओं काफी जोश और उत्साह से देखने को मिल रहा है। वहीं इस गठजोड़ ने बीजेपी की नींदें उड़ा रखीं हैं। वहीं सपा-बसपा के नेता चाहते हैं कि अखिलेश लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ खड़े हों अगर अखिलेश नेताओं की बात मानते हैं तो वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन उनका वाराणसी से चुनाव लड़ना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

जानकारों की माने तो यूपी में विपक्ष के लिए अखिलेश से बड़ा कोई और चहरा नहीं है ऐसे में विपक्षी नेता अखिलेश को मोदी के खिलाफ उतारना चाहते हैं। लेकिन अखिलेश इस मैदान से चुनाव नहीं लड़ेंगे अगर वह चुनाव लड़ते हैं तो उनकी दिलेरी मानी जाएगी वाराणसी मोदी का गढ़ है और मोदी को वहां से हराना बेहद मुश्किल है। यहां पर अखिलेश की हार पार्टी के लिए बड़ी हार होगी साथ ही अखिलेश की छवि पर भी सवालिया निशान होगा।

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भारतीय राजनीति के इतिहास की बात की जाए तो दो बड़े नेता बहुत कम ही एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव में खड़े हुए हैं। पिछले चुनाव की बात की जाए तो वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ अरविन्द केजरीवाल के अलावा कोई बड़ा चेहरा नहीं था। यहां पर पीएम मोदी ने एक बड़ी जीत हासिल की थी वहीं अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ स्मृति ईरानी खड़ी हुई थी। उस समय राहुल ने स्मृति ईरानी को हराया था। इन वजहों से अखिलेश अपने संसदीय क्षेत्र कन्नौज से ही चुनाव लड़ेंगे।

वाराणसी से चुनाव न लड़ने की तीसरी वजह

यूपी में वाराणसी का बीजेपी का गढ़ माना जाता है। यहां पर बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड सबसे ज्यादा प्रभावी है। हाल ही में निकाय चुनाव में भी इसकी झलक देखने को मिली थी। लेकिन बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि अखिलेश मोदी को यहां पर कड़ी टक्कर दे सकते हैं। लेकिन जातीय समीकरण के आधार पर यहां पर मोदी का दबदबा दिखाई पड़ रहा है।

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