अन्ना हजारे बोले- मोदी सरकार ने लोकतंत्र को किया कमजोर, गोरे चले गए काले अंग्रेज आ गए

अन्ना हजारेअन्ना हजारे

लखनऊ। भारत के 21वीं सदी के गांधी कहे जाने वाले व पद्मभूषण से अलंकृत वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने मोदी सरकार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने देश के लोकतंत्र को कमजोर कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आश्वासन की सरकार है। बता दें कि अन्ना अपने दो दिवसीय जनजागरण यात्रा के तहत यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंचे हुए हैं। यहां पर वह पारा क्षेत्र में एक जनसभा में बोल रहे थे।

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अन्ना हजारे बोले- अंग्रेज चले गए, काले आ गए

पारा क्षेत्र के पारा सदरौना स्थित मान्यवर कांशीराम शहरी आवास कालोनी में आयोजित जनसभा अन्ना बोले रहे थे। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार आड़े हाथ लेते हुए कहा कि लोकतंत्र संघर्ष से मजबूत होता है। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर कर दिया है। इस सरकार का ध्यान काम करने से ज्यादा विरोधियों को दबाने पर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में 26 जनवरी, 1950 से लोकतंत्र आ गया, और गोरे अंग्रेज देश से चले गए, लेकिन देश में ‘काले अंग्रेज’ अभी भी हैं। नेता, मंत्री व अधिकारी कहने के लिए तो जनता के सेवक हैं, लेकिन अब तो सभी सेवक मालिक हो गए हैं।

मोदी सरकार में नहीं आया लोकपाल और लोकायुक्त

वहीं अन्ना ने इस दौरान मोदी सरकार पर लोकपाल और लोकायुक्त बिल न लाने को लेकर सवाल उठाये उन्होंने कहा कि लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्त का कानून 2013 में ही पारित हो चुका है। लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी इस पर अभी तक अमल नहीं किया गया है। अन्ना ने मोदी सरकार पर जनता की उम्मीद तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि नई सरकार आई तो थोड़ी उम्मीद जागी।लेकिन इतने लंबे समय तक कानून को लटकाए रखने की वजह से मोदी सरकार की मंशा पर पूरे देश को संदेह होने लगा है। सरकार इसके प्रावधानों में संशोधन करके उसके पूरे उद्देश्य को ही खत्म कर देना चाहती है।

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चुनावी प्रणाली में सुधार जरुरी

इस दौरान अन्ना ने देश में चुनावी प्रणाली में सुधार की जरुरत बताया उन्होंने कहा कि चुनावी प्रणाली में सुधार के बिना न तो राजनीतिक भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सकेगी और न ही जनहित में कार्य हो पायेगा। संविधान में पक्ष और पार्टी न होनें के बावजूद चुनावी गड़बडियों के कारण ही जनता की सरकार बनने की जगह दल की सरकार बनती है। जिससे ये सरकारें जनहित की जगह दलहित में काम करती हैं।

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