अनसुनी कहानी: बाबरी मस्जिद गिराने वाला ही बन गया इस्लाम का समर्थक

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लखनऊ। आज बाबरी मस्जिद गिराए जाने की 25 बरसी है। इस दिन को जहाँ शौर्य दिवस के तौर पर मना घोषणा की है। जबकि मुस्लिम संगठन इसे काला दिवस के रूप में माना रहा है। हम आपको इस मामले में एक ऐसी आँखों देखी कहानी बताने जा रहे हैं जो सच आपने आज से पहले कभी नहीं जाना होगा। एक ऐसे शख्स की कहानी जो बाबरी मस्जिद को गिराने वाला था। वह आज खुद इस्लाम का अनुयायी बन गया।

आज हम एक वैबसाइट को दिए इंटरव्यू के द्वारा उस शख्स मुंह जबानी बाबरी विध्वंस की पूरी कहानी बताएँगे। ये शख्स मोहम्मद आमिर उर्फ़ (बलवीर) जिन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस में पहला हमला किया था। लेकिन बाद में मोहम्मद आमिर उर्फ़ बलवीर ने इस्लाम को करीब से जानने की कोशिश की तो इस धर्म को इन्होंने सबसे अच्छा मजहब माना और इन्होंने अपनी ज़िन्दगी में इस्लाम को अपनाया।

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बाबरी विध्वंस मामले में मोहम्मद आमिर उर्फ़ (बलवीर) इंटरव्यू

पहला सवाल:- जब किसी धार्मिक स्थल को तोड़ना आसान नहीं तो फिर एक मस्जिद को कैसे तोड़ दिया गया।

आमिर का जवाब:- रामायण नामक एक सीरियल बनाया गया उस के द्वार लोगों के अंदर राम नाम की आस्था पैदा की गई। फिर इसी आस्था को बाबरी विध्वंश में काम लाया गया। समस्त साधु समाज को जोड़ने के लिए 1990 चरण पादुका यात्रा चलाई गई। जिसके द्वारा समस्त साधु समाज को एक किया गया।

जिस समय यह यात्रा चलाई गयी उस समय देश के 4096 सीटें थी फिर 40 हजार रथ पुरे देश में भेजे गए। उन्होंने पूरे देश का चक्कर लगाया और इस यात्रा की कामयाबी के बाद 6 दिसंबर एक सडयंत्र रचा गया। फिर एक नारा दिया गया ‘राम लला हम आएंगे मंदिर वही बनाएंगे’ इस नारे ने अपना काम दिखाना शुरू कर दिया।

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दूसरा सवाल:- क्या आप मस्जिद की गिराने से पहले मस्जिद के अंदर गए थे?

आमिर का जवाब :- हाँ में पर हमला होने से पहले मस्जिद के अंदर गया था। मैंने वहां बना मेंबर देखा सब चीजें जैसी की तैसी थी पूरी मस्जिद सफ़ेद रंग के संगमरमर की चादर ओढ़ें हुए थी।

तीसरा सवाल:- आप को मस्जिद के ऊपर जाने का रास्ता कैसे मिला आप कैसे मस्जिस के ऊपर पहुचे।

आमिर का जवाब जवाब:- बाबरी मस्जिद के पास बगल से गुजरने वाले मानस भवन रोड की तरफ हमें भेजा गया। जहाँ बाबरी मस्जिद पर चढ़ने के लिए सीढ़िया वहाँ मौजूद थी। वहां पर मस्जिद को गिराने आने वाले औजार-हथियार पर्याप्त मात्रा में मौजूद थे और रस्सियां पहले से वहां मौजूद थी जिन को पकड़कर मैं ऊपर चढ़ा।

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मुझे बीच का गुम्बद तोड़ने करने का टारगेट दिया गया था, मैं अपने जूनून के साथ ऊपर चढ़ रहा था लेकिन डर यह भी था कि जिस तरह मुलायम सिंह ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थी, कही ऐसा हादसा आज मेरे साथ भी न हो जाये। फिर मैंने ऊपर चढ़कर नारा लगाया ‘राम लाला हम आएंगे मंदिर यही बनाएंगे।’

चौथा सवाल:- आप को डर किस बात का था।

आमिर का जवाब:- हम लोगों के नारा लगा दिया था ‘कसम खाते है। राम मंदिर यही बनाएंगे’ जब हम ऊपर थे तो वहां एक हेलीकाप्टर आया वह हेलीकॉप्टर सर्वे करने आया, तब गुम्बद पर चढ़ने वाले लोग उस हेलीकाप्टर को देखकर डर गए थे हम लोग बहुत डरे हुए थे कि अब फायरिंग होगी और हम सब मारे जाने वाले हैं, कुछ देर बाद हेलीकॉप्टर चला गया।

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हेलीकॉप्टर जाने के बाद बहुत देर तक सन्नाटा पसरा रहा सब चुपचाप थे कोई किसी की तरफ इशारा तक नहीं कर रहा था। अचानक नीचे से आवाज आयी घबराने की कोई जरुरत नहीं है। ‘हमला करो’ मैंने एक घबराहट भरे अंदाज में पहला वार गुम्बद पर किया और दूसरा वार किया यहाँ तक की तीसरा वार किया जिस के बाद मेरी घबराहट बढ़ गई, मेरे हाथ कांपने लगे।

उस वक़्त मेरा दिल बहुत तेजी से धड़कने लगा मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मेरे सामने अँधेरा छा गया जब मैने पलट कर देखा तो मेरे सभी साथी जा चुके थे अब मेरी घबराहट बहुत बढ़ती चली गई मुझे लगा मेरी मौत करीब आ गई है। मुझे बहुत पसीना आने लगा मेरा में अपना संयम खोने लगा था। मेरा बैलेंस बिगड़ने लगा अगर में वहां से गिर जाता तो इतनी ऊंचाई से गिरकर मेरी मौत ही हो जाती।

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वही दूसरा डर इस बात का लग रहा था कि मुस्लिम लोग मुझे अब नहीं छोड़ेंगे, मगर कुछ देर बाद मेरा साथी जोगिन्दर पाल आया और वह मुझे किसी तरह नीचे उतार लाया। मुझे व स्वामी दयानंद दादू नारनोल हरिनारायण वाले कार्यालय में ले जाया गया जहाँ मुझे पानी पिलाकर तस्सली दी गई।

उसके बाद मेरी जिंदगी में एक नया मोड़ आ गया मैं उन सब घटनाओं को बार बार सोच रहा था। मगर उस पूरी मस्जिद में कोई हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमे यह साबित हो सके कि उस इमारत को किसी दूसरी इमारत को गिराकर वनाया गया हो। उस मस्जिद का हर हिस्सा बहुत खूबसूरत था। इस घटना के बाद मेने इस्लाम का गहन अध्यन किया। जिसमें मुझे पता चला की कोई इस्लाम का अनुयायी किसी मंदिर को गिराकर मस्जिद नहीं बना सकता क्योकि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाना इस्लाम के सिद्धन्तो के खिलाफ है।

मेने अपने अध्यन में इस्लाम को श्रेष्ठ और अमन शांति का मजहब पाया जिसके बाद मेने अपनी ज़िन्दगी में इस्लाम को अपनाया है। इस्लाम तो क्या कोई भी मज़हब आपस में बेर करना नहीं सिखाता। लेकिन कुछ लोगों ने धर्म की आध में लोगों को बहक कर इनको नापाक कर रखा हुआ है… आम जनता सियासी मोहरा बनी हुयी है… और इनका कुछ भी नहीं जाता भुगतना और मरना आम इंसान को पढता है।

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