अयोध्‍या मामले में सुब्रमण्‍यम स्‍वामी को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को  सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि वह किसी भी पार्टी को समझौते के लिए नहीं कह सकती है।  यह दोनों ही पार्टियों के बीच का मामला है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट किसी को भी समझौते के लिए बाध्‍य नहीं कर सकता है।

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तीसरे पक्ष के रूप में दखल नहीं दे पाएंगे सुब्रमण्‍यम स्‍वामी

इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा है कि उन्‍हें इस मामले में तीसरे पक्ष के रूप में शामिल होने की अनुमति क्‍यों की जाए?  सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी इस मामले में तीसरे पक्ष के रूप में दखल नहीं दे पाएंगे।

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इस मामले में कोई आईए  न करें स्वीकार

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को कहा कि इस मामले में कोई आईए स्वीकार न करे। कोर्ट ने हस्तक्षेप याचिकाओं के बारे में अलग-अलग पूछा।  सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका की मौलिकता के बारे में कहा तो विरोधी वकीलों ने इसका विरोध किया।  मुस्लिम पक्ष के राजीव धवन ने कहा कि स्वामी की याचिका यानी को नहीं सुना जाय।  इस पर नाराज़ स्वामी बोले कि ये लोग पहले भी कुर्ता-पजामा के खिलाफ बोल चुके हैं।

काग़जी कार्रवाई और अनुवाद का काम लगभग पूरा

सरकार की ओर से एएसजी तुषार मेहता ने भी कहा कि तीसरे पक्षों यानी हस्तक्षेप याचिकाओं को इस समय सुना जाना उचित नहीं। धवन ने कहा कि हस्तक्षेप याचिका दायर कर कोर्ट में पहली कतार में बैठने का ये मतलब नहीं कि उनको पहले सुना जाय।  इस पर स्वामी ने पलट कर जवाब दिया कि पहले ये लोग मेरे कुर्ते-पाजामे पर सवाल उठा चुके हैं और अब अगली कतार में बैठने पर।  इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने 14 मार्च से लगातार सुनवाई करने की बात कही थी।  गौरतलब है कि 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के सामने हुई मीटिंग में सभी पक्षों ने कहा कि काग़जी कार्रवाई और अनुवाद का काम लगभग पूरा हो गया है। इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी।

हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ सबसे पहले सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लिहाज़ा पहले बहस करने का मौका उन्हें मिल सकता है।  पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने काग़जी कार्रवाई और अनुवाद का काम पूरा करने के आदेश दिए थे। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में  तीन जजों की बेंच सुनवाई की दिशा तय करेगी।

 

 

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