चैत्र नवरात्रि: ऐसे करें कलश स्थापना, ये है पूजा की सही विधि

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लखनऊ। चैत्र नवरात्रि रविवार 18 मार्च से शुरू हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है । कलश स्थापना की एक विधि होती है। नवरात्रों में किसी योग्य पंडित को बुलाकर भी स्थापना करवा सकते हैं। आज हम आपको चैत्र नवरात्रि  में कलश स्थापना की सही विधि बता रहे हैं । कलश स्थापना के लिये प्रतिपदा के दिन स्नानादि कर पूजा स्थल को शुद्ध कर लें।

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जानें कलश स्थापना की सही विधि

कलश स्थापना के लिये प्रतिपदा के दिन स्नानादि कर पूजा स्थल को शुद्ध कर लें। इसके बाद सबसे पहले लकड़ी के एक आसन पर लाल रंग का वस्त्र बिछायें। ज्योतिर्विद पं रविदास जी महाराज देवरिया वाले के मुताबिक वस्त्र पर श्री गणेश जी का स्मरण करते हुए थोड़े चावल रखें। अब मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर जौ बोयें, फिर इस पर जल से भरा मिट्टी, सोने या तांबे का कलश विधिवत स्थापित करें।

कलश पर रोली से स्वास्तिक या ऊँ बनायें। कलश के मुख पर रक्षा सूत्र भी बांधना चाहिये साथ ही कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिये। अब कलश के मुख को ढक्कन से ढक कर इसे चावल से भर देना चाहिये।

एक नारियल लेकर उस पर चुनरी लपेटें व रक्षासूत्र से बांध दें। इसे कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें और अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करें व षोडशोपचार से पूजन के उपरान्त फूल व मिठाइयां चढ़ा कर माता का पूजन ध्यान पूर्वक करें। इस घट पर कुलदेवी की प्रतिमा भी स्थापित की जा सकती है। कलश की पूजा के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करना चाहिए।

चैत्र नवरात्रि में इन 9 मंत्रों से करें नवदुर्गा की पूजा

नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा-आराधना का विधान है। नवदुर्गा के इन बीज मंत्रों की प्रतिदिन की देवी के दिनों के अनुसार मंत्र जप करने से मनोरथ सिद्धि होती है। आइए जानें नौ देवियों के दैनिक पूजा के बीज मंत्र –

देवी : बीज मंत्र

  1. शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम:।
  2. ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
  3. चन्द्रघण्टा : ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
  4. कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:।
  5. स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
  6. कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
  7. कालरात्रि : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
  8. महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
  9. सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

चैत्र नवरात्रि में चाहते हैं मनचाहा वरदान तो ऐसे करें मंत्र सिद्धि

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि

महाकाली,महालक्ष्मी एवं महासरस्वती की आराधना पूजन जप व् मंत्रों की सिद्धि के लिए नवरात्रि का समय विशेष रहता है। नवरात्रि में माता की आराधना के साथ ही कई देवता-देवी के मंत्रों की सिद्धियां की जाती है एवं स्वयं की रक्षा के लिए भी सिद्धि की जाती है। आइए जानें कैसे करें मंत्र सिद्धि…

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लाभ-प्राप्ति का मंत्र

ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकारकत्रै सर्वविघ्न

प्रशमनाय सर्वराज्य वश्यकारणाय सर्वजन सर्वस्त्री-पुरुषाकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा

किसी भी कार्य में,व्यापार में लाभ व् भूमि में लाभ के लिए उपरोक्त मंत्र का जाप नवरात्रि में प्रात: काल एक माला करने से सिद्ध हो जाएगा। फिर अपने प्रतिष्ठान में रोज एक माला करें अच्छा लाभ मिलेगा।

ऋद्धि-सिद्धि प्राप्ति का मंत्र

ॐ ह्रीं णमो अरिहंताणं मम ऋषि

वृद्धि समीहितं कुरु कुरु स्वाहा

शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर नवरात्रि में उपरोक्त मंत्र प्रतिदिन प्रात: व शाम को एक माला करने से सर्वप्रकार की ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है |

चक्रेश्वरी देवी का मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं चक्रेश्वरी चक्रवारुणी,

चक्रधारिणी चक्रवेगेन मम उपद्रवं

हन हन शांति कुरु कुरु स्वाहा |

नवरात्रि में चक्रेश्वरी देवी का ध्यान कर उपरोक्त मंत्र की प्रतिदिन 10 माला करें। नवरात्रि बाद एक माला रोज करें अत्यंत लाभ मिलेगा व् प्रत्येक उपद्रव शांत होंगे।

लक्ष्मी-प्राप्ति के लिए मंत्र

ॐ शुक्ला महाशुक्ले निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नम:

नवरात्रि में माँ लक्ष्मी का ध्यान करके प्रतिदिन 10 माला करें व बाद में 1 माला रोज करें घर में लक्ष्मी बनी रहेगी।

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