श्रीलंकाई पोर्ट की तरह पाकिस्तानी पोर्ट पर कब्ज़ा करेगा चीन?

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श्रीलंकाई चीन को क़र्ज़ देने में नाकाम रहा था इसलिए उसे हम्बनटोटा सौंपना पड़ा था। श्रीलंका के साथ ऐसा होने के बाद पाकिस्तान में चीन जिस ग्वादर पोर्ट पर काम कर रहा है उस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

श्रीलंकाई ने हम्बनटोटा पोर्ट को 99 साल के पट्टे पर चीन को सौंपा 

  • लोगों का कहना है कि ग्वादर पोर्ट भी इसी राह पर बढ़ रहा है।
  • चीन पाकिस्तान में 55 अरब डॉलर की रक़म अलग-अलग परियोजनाओं में ख़र्च कर रहा है।
  • पाकिस्तान के बारे में बताया जा रहा है ।
  •  दबाव के बावजूद इस प्रोजेक्ट के अनुबंधों को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
  • विश्लेषकों का मानना है कि इस रक़म का बड़ा हिस्सा क़र्ज़ के तौर पर है।

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श्रीलंका के साथ ऐसा हुआ है

  • श्रीलंका के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था।
  • पाकिस्तान में भी आशंका जतायी जा रही है
  • पाक को भी ग्वादर समेत अन्य संपत्तियों का मालिकाना हक़ चीन को नहीं सौंपना पड़े।
  • आशंकाओं के अपने आधार हैं।
  • जेएनयू में दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र की प्रोफ़ेसर सविता पांडे कहती हैं’पाकिस्तान में चीन के अपने हित तो जुड़े ही हुए हैं,
  • वो चीन को भारत को देखते हुए कुछ ज़्यादा छूट दे रहा है।
  • चीन भी पाकिस्तान में निवेश करता है तो भारत उसकी नज़र में रहता है।
  • पांडे कहती हैं, ”हम्बनटोटा से ग्वादर अलग है, लेकिन क़र्ज़ का दायरा उससे कम नहीं है।
  • चीन वहां अपने आर्थिक हितों से समझौता नहीं करेगा।”
  • चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर की संयुक्त समिति की सातवीं बैठक से भी इस तरह की बातें सामने आई थीं।
  • पाक मीडिया के अनुसार पाक ने दिआमेर-बशा डैम के लिए चीन से 14 अरब डॉलर का फंड लेने से इनकार कर दिया था।
  • पाकिस्तान ने इकोनॉमिक कॉरिडोर में बांध बनाने के अनुरोध को भी वापस ले लिया है।
  • साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक
  • पाकिस्तान में ग्वादर और चीन के समझौते को लेकर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान चीन का आर्थिक उपनिवेश बन रहा है।
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