10-12 लाख की लागत से बनी कम्प्यूटर लैब, फांक रही है धूल

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लखनऊ। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद की बोर्ड परीक्षा वर्ष 2017-18 शुरु हो चुकी है। जिसमें हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट स्तर पर कम्प्यूटर विषय की मान्यता है। इस  कारण कम्प्यूटर विषय के लिए होनेे वाली बोर्ड परीक्षा में दिनांक 20 फरवरी को हाईस्कूल में 79532 व  21 फरवरी को इण्टरमीडिएट में 86111 छात्र-छात्राएं भाग लेगी।

यूपी बोर्ड में बगैर शिक्षक हो रही है कम्प्यूटर

जबकि प्रदेश की किसी भी राजकीय,अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लगभग पिछले तीन वर्षों से न तो कोई कम्प्यूटर शिक्षक हैं। न ही कम्प्यूटर शिक्षण कार्य हो रहा है। यहां तक विद्यालयों में 10-12 लाख की लागत से बनी लैब धूल फाक रही है। 5 वर्षों तक कम्प्यूटर शिक्षण कार्य कर चुके 4000 कम्प्यूटर अनुदेशक बेरोजगारी व भुखमरी की जिन्दगी जी रहे हैं।

योगी सरकार का आदेश केवल कागजों में ही सिमटा

उप्र माध्यमिक कम्प्यूटर अनुदेशक एसोसिएशन के महामंत्री अनिरुद्ध पाण्डेय ने बताया कि कम्प्यूटर शिक्षा व शिक्षकों की समस्याओं के समाधान हेतु लगातार तीन वर्षों से संघर्ष करते चले आ रहे है। लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। जबकि योगी सरकार में यूपी बोर्ड परीक्षा शुरु होने से पहले कम्प्यूटर शिक्षक व कम्प्यूटर वाले विद्यालयों को ही परीक्षा केन्द्र बनाने का 4 माह पूर्व 16 अक्टूबर 2017 को शासनादेश जारी किया था। लेकिन यह आदेश केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई।

सेवा बहाली व सेवा सुरक्षा पर अतिशीघ्र विचार की योगी सरकार से  उम्मीद

यह भी बताया कि बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यालय के प्रधानाचार्य व प्रबंधक द्वारा पूर्व में कार्य कर चुके इन्हीं कम्प्यूटर अनुदेशकों से सेवाएं व सहयोग ली जा रही है। यहां तक कि कक्षा 9 व 11 का आनलाइन पंजीकरण व परीक्षा का मूल्यांकन भी कराया जाता है। संगठन प्रदेश की योगी सरकार से यह उम्मीद करता है कि कम्प्यूटर अनुदेशकों की सेवाएं एव सहयोग को संज्ञान में लेते हुए इनकी सेवा बहाली व सेवा सुरक्षा पर अतिशीघ्र विचार करेगी।

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