भ्रष्टाचार के भंवर में फंसी मोदी सरकार, कांग्रेस ने की इस्तीफे की मांग

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नई दिल्ली। यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे जेराराम रमेश ने मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। रमेश ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की निजी सचिव वैभव डांगे पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की है।

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बताते चलते हैं कि वैभव डांगे केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की निजी सचिव हैं और भारतीय फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी नामक संस्था चलाती है। जयाराम रमेश का आरोप है कि 2016 में इंदौर में ग्लोबल बाम्बू सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें से कई तरीकों से डांगे कंपनी से सरकार के लिए फायदा पहुंचाया गया था।

उन्होंने कहा कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी के साथ वैभव डांगे को 8 अगस्त 2014 को 5 साल के लिए ठेके आधार पर गडकरी की निजी सचिव की नियुक्ति की गई। इस प्रकार उन पर सरकारी सेवा संचालन नियम लागू होते हैं।

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पीसी कर किया खुलासा

जयराम रमेश ने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कहा कि महाराष्ट्र और केंद्र सरकार ने डांगे की कंपनी को आर्थिक लाभ पहुंचाया। वैभव डांगे ने अपनी कंपनी आईएफजीई की शुरुआत महाराष्ट्र के चालीसगांव निवासी मोतीराम किसानराव पाटिल के साथ मिलकर अक्टूबर, 2014 को की थी। दोनों की इस कंपनी में बराबर की हिस्सेदारी है।

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कंपनी का पंजीकरण धारा के तहत हुआ हैजिसका मतलब ये हुआ कि कंपनी लाभ कमाने के लिए काम नहीं कर सकती। साथ ही केन्द्रीय लोक सेवा (आचार संहिता) के नियम 12 के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी लाभ अर्जित करने वाले किसी भी संस्थान में योगदान नहीं दे सकता है। जबकि डांगे के अनुसार परिवहन मंत्रालय ने उनकी कंपनी को कभी कोई अनुदान नहीं दिया।

वेबसाइट से हुआ खुलासा

आईएफजीई की वेबसाइट के मुताबिक कंपनी ने नितिन गडकरी के अधीन आने वाले कई विभागों और पीएसयू के साथ मिलकर विभिन्न विषयों पर कई सम्मेलन और सेमिनार आयोजित किये हैं। कंपनी द्वारा आयोजित इंदौर में अप्रैल 2016 में हुए ग्लोबल बंबू सम्मेलन परिवहन मंत्रालय के सहयोग से हुआ है।

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मुम्बई के शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम में मई 2017 को ग्रीन पोर्ट्स एंड ऑयल स्पिल मैनेजमेंट‘ पर हुए सम्मेलन का आयोजन भी वैभव डांगे की कंपनी ने ही किया था।

गडकरी से माँगी सफाई

जयराम रमेश ने नितिन गडकरी से पूरे मामले पर सफाई मांगते हुए कहा कि जनता के पैसों को सावर्जनिक रुप से दुरुपयोग होने की जानकारी मंत्री को थी। रमेश ने दावा करते हुए कहा कि वैभव डांगे परिवहन मंत्री के पीएस होने के अलावा एक सक्रिय आरएसएस कार्यकर्ता भी है।

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केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सुरेश प्रभु दोनों आईएफजीए के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। साल 1996 से लेकर साल 1999 तक महाराष्ट्र एबीवीपी में डांगे संगठन मंत्री थे।

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