मोदी के सवाल बने उन्हीं के गले की हड्डी, कांग्रेस ने कहा पीएम तोड़ें चुप्पी

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आतंकवाद तथा घुसपैठ की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पांच सवाल किये हैं। ये वही सवाल हैं जिनका मोदी ने पांच साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जवाब मांगा था। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि श्री मोदी सत्ता में आने के बाद आज देश में आतंकवाद व घुसपैठ की स्थित कई गुना खराब हो गयी है, लेकिन अब इस चुप्पी साधे हुए हैं।

पहला  सवाल

सिंघवी ने एक जनसभा में श्री मोदी के पांच साल पहले दिये गये एक भाषण का वीडियो पत्रकारों को दिखाया। इसके बाद ठीक वही सवाल दोहराते हुए उनसे पूछा कि हमें जवाब दीजिये कि ये जो आतंकवादी हैं , जो बारूद और शस्त्र हैं वो कहाँ से आते हैं? वो तो विदेश की धरती से आते हैं? और सीमायें संपूर्ण रूप से आपके कब्ज़े में हैं? सीमा सुरक्षा बल आपके कब्ज़े में है।

दूसरा सवाल

श्री मोदी की ही शैली में प्रवक्ता ने अगला सवाल दोहराया कि हम आपसे दूसरा सवाल पूछना चाहते हैं। कि जो  आतंकवादियों के पास धन आता है, कहां से आता है। इस पैसे के पूरे लेन देन का कारोबार केंद्र  सरकार के कब्ज़े में है। जो रिजर्व बैंक के अंतर्गत है। लेन-देन बैंकों के माध्यम से होता है। क्या प्रधानमंत्री आप इतनी निगरानी नहीं रख सकते कि यह जो धन विदेश से आकर आतंकवादियों के पास जाता है। आपके हाथ में हैं, आप उसको क्यों नहीं रोकते हैं?

तीसरा सवाल

तीसरा सवाल भी उन्हीं की भाषा में पूछते हुए श्री सिंघवी ने कहा विदेशों से जो घुसपैठिये आते हैं। जो आतंकवादियों के रूप में आते है। आतंकवादी घटना करते हैं और भाग जाते हैं। प्रधानमंत्रीजी आप हमें बताइये। सीमायें आपके हाथ में हैं। तटीय सुरक्षा आपके हाथ में है। सीमा सुरक्षा बल, सेना सब आपके हाथ में है, नौसेना आपके हाथ में है। ये विदेश से घुसपैठिये कैसे देश में घुस जाते है?

चौथा सवाल

कांग्रेस का चौथा सवाल भी उन्हीं के अंदाज में पूछा कि सारी संचार व्यवस्था आपके हाथ में है। कोई भी अगर टेलीफ़ोन पर बात करता है। ई-मेल करता है, कोई कम्युनिकेशन करता है। तो केंद्र सरकार उसको अवरुद्ध कर सकती है। अवरुद्ध करके जानकारियां पा सकती हैं कि आतंकवादी क्या बात कर रहे हैं और आप उसे रोक सकते हो।

पांच  सवाल

सिंघवी ने कहा कि हम पूछना चाहते हैं और आपका ही सवाल दोहरा रहें है। प्रधानमंत्री मोदी जी, इस बारे में आपने क्या किया है?
आखिरी सवाल आतंकवादियों के प्रत्यर्पण के बारे में उन्हीं की शैली में पूछा। सिंघवी ने कहा कि हम पांचवां सवाल पूछते हैं, विदेशों में जो आतंकवादी भाग चुके हैं। विदेश में बैठ कर के जो हिंदुस्तान में आतंकवादी घटनाए कर रहे है। उनका प्रत्यर्पण कर विदेश से हिंदुस्तान लाने का हमें अधिकार होता है।

आपकी विदेश नीति में क्या ताकत है?

एक बार इन पांचों चीज़ो पर कुछ करके दिखाइए, आतंकवाद जड़-मूल से उखड़ जाएगा? श्री सिंघवी ने कहा कि मोदी सरकार के पास विपक्ष के सवालों के जवाब नहीं हैं क्योंकि उसके कार्यकाल में आतंकवाद, घुपसैठ और संघर्ष विराम की घटनाएं कई गुना बढी हैं। हर सवाल पर मोदी चुप्पी साध लेते हैं और सवालों का ठोस जवाब देने की बजाय राष्ट्रवाद तथा जुमलों के रूप में उत्तर देने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि अब जवाबदेही निभानी होगी और ठोस आधार पर जवाब चाहिए जुमलों से काम नहीं वाला है।

देखें मोदी सरकार और संप्रग सरकार का आंकडा

प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार के 45 माह के कार्यकाल में आतंकवाद की 207 बड़ी घटनाएं हुई हैं। जबकि संप्रग सरकार के 45 माह में 96 घटनाएं हुई थीं। इसी तरह से जम्मू कश्मीर में इस अवधि में 286 जवान शहीद हुए हैं। जबकि संप्रग के समय इतनी अवधि में 115 जवान शहीद हुए थे। इस सरकार के कार्यकाल में हिंसा में 138 आम नागरिक मारे जा चुके हैं। जबकि संप्रग में यह आंकडा 72 था। मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में संघर्ष विराम की 2555 घटनाएं हो चुकी हैं । जबकि संप्रग के समय 45 माह में 543 घटनएं हुई थीं। संघर्ष विराम की घटनाओं में तब 19 जवान शहीद हुए थे,लेकिन मोदी सरकार के दौर में अब तक 62 जवान शहीद हो चुके हैं।

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