नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन्स के अध्यक्ष बने डा. सूर्यकांत

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लखनऊ। केजीएमयू के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सूर्यकान्त चेस्ट फिजीशियन्स की सर्वोच्च राष्ट्रीय संस्थाओं में एक नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन्स के अध्यक्ष पद का पदभार संभालेंगे। हाल ही में उन्हें इस पद के लिए हुए चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित हुए है। डा. सूर्यकान्त कुछ समय पूर्व ही चेस्ट फि जीशियन्स की दूसरी राष्ट्रीय सर्वोच्च संस्था इण्डियन चेस्ट सोसायटी द्वारा आहूत देशव्यापी चुनाव में भी रिकार्ड मतों से विजयी होकर सोसाइटी के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में पद पर काबिज हुए थे।

डा. सूर्यकान्त इण्डियन चेस्ट सोसायटी और नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके है। इसके अतिरिक्त पूर्व में डा. सूर्यकान्त इण्डियन साइंस काग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके है। गौरतलब है कि  डॉ. सूर्यकांत उत्तर प्रदेश ट्यूबरकुलोसिस टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन पद पर भी कार्यरत है। इसके साथ ही डा. सूर्यकान्त आई एम ए, लखनऊ में भी निर्वाचित अध्यक्ष है।

डा. सूर्यकान्त को ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इण्डिया, इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन, इण्डियन चेस्ट सोसायटी, नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फि जिशियन आदि द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें प्राइड ऑफ इण्डिया व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विज्ञान गौरव अवार्ड (विज्ञान के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च पुरस्कार) और राज्य हिन्दी संस्थान द्वारा विश्वविद्यालय स्तरीय हिन्दी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डा. सूर्यकान्त ने बताया कि इलेक्टेड प्रेसीडेन्ट के तौर पर वह 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2019 तक कार्यरत रहेगें। इसके बाद एक वर्ष तक वह पूर्वकालिक अध्यक्ष का  पदभार संभालेंगे। उन्होने कहा कि अध्यक्ष के रूप में वे सोसाइटी का पूरे देश में  वृहद स्तर पर विस्तार  करेगें। देश भर में सोसाइटी की गतिविधियों और सदस्य संख्या बढायेगें तथा सोसाइटी के सदस्य व अन्य चिकित्सकों को नई तकनीको से अपडेट करायेगें। उनकी प्राथमिकता इस बात पर भी होगी की राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों खासतौर पर टीबी और गैर संचारी रोगों की रोकथाम और वायु प्रदूषण से जुडे मुद्दों पर भी सोसाइटी के सदस्य बढ़ चढ़ कर भागीदारी करें।

उन्होने बताया कि इस संदर्भ में क्रियान्वयन हेतु देश भर के फि जिशियन्स को स्थानीय स्तर पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया जायेगा। डा. सूर्यकान्त ने बताया कि सोसाइटी अब सक्रिय रूप से चिकित्सा शोध कार्यो में भी शामिल होगी ताकि लंग हेल्थ से जुडी नई तकनीकें और गाइडलाइन्स खोजी जा सकें।

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