सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को देना होगा क्षय रोगियों का डाटा

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लखनऊ। टीबी एक गंभीर जन स्वास्थ्य की समस्या है। पुर्नक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत क्षय रोगियों को निःशुल्क जांच व उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे संक्रामक रोगियों में क्षय ड्रग रजिस्टेन्स के कारण रोगियों के बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है। जिलाक्षय अधिकारी डॉ. बीके सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन संख्या जेड-28015/2/2012-टीबी दिनांक 7 मई 2012, 21 जुलाई 2015 एवं 16 मार्च 2018 के निर्देशानुसार सभी स्वास्थ्य प्रदाताओं द्वारा रोगी से सम्बन्धित सारी जानकारी न देने पर दो साल की सजा हो सकती है।

क्षय रोगियों के इलाज में लापरवाही पर दो वर्षों तक कारावास ,जुर्माना व सजा का प्रावधान

यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी औऱ जिला क्षय रोग अधिकारी अथवा प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य है। जानकारी को जनपद के जिला क्षय रोग अधिकारी को ई-मेल (dtouplno@rntcp.ogr) के माध्यम से भी जमा कर सकते हैं । कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही और परिद्वेषपूर्ण कार्य किये जाने पर भारतीय दंड संहिता ( 1860क 45) की धारा 269 और 270 के उपबंधों  के तहत दो वर्षों तक कारावास या जुर्माना व सजा का प्रावधान किया गया है।

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प्राइवेट डॉक्टर को जानकारी देने पर 100 व इलाज पूरा हो जाने पर 500 रुपये

सिंह ने यह भी बताया कि यदि कोई भी मरीज प्राईवेट या सरकारी अस्पताल या क्लीनिक से आता है। तो उसे 50 रुपये प्रति माह पोषण भत्ते के रूप में दिया जाएगा। यह पोषण भत्ता राशि डीटीसी( डायरेक्ट बेनिफीशरी ट्रांसफर के माध्यम से दी जाएगी। इसके अलावा जो भी प्राइवेट डॉक्टर, क्लीनिक व फार्मेसी केमिस्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जानकारी देगा। उसको 100 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में और मरीज का इलाज पूरा कर उसे रोगी को क्योर करने वाले डॉक्टर को 500 रुपये अलग से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

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