उच्च न्यायालय का आदेश, फिर भी नहीं मिली एचएएल स्कूल के शिक्षकों को ग्रेज्यूटी

एचएएल स्कूलएचएएल स्कूल

लखनऊ। एचएएल स्कूल लखनऊ के अब तक लगभग साठ शिक्षक,कर्मचारी सेवा निवृत्त हो चुके हैं। किन्तु स्कूल की प्रबन्धन समिति ने सर्विस नियमावली में ग्रेज्यूटी का प्रावधान होते  हुए भी आज तक किसी कर्मचारी को ग्रेज्यूटी का भुगतान नहीं किया है।

किसी भी कर्मचारी को नहीं होता है ग्रेज्यूटी का भुगतान

यहां यह भी अवगत कराना जरूरी होगा कि  स्कूल के कई शिक्षकों, कर्मचारियों को सेवानिवृत्त हुए लगभग पन्द्रह वर्ष हो गए हैं। उनमें से कुछ देहान्त हो चुका है। कुछ शिक्षकों ने विवश होकर उच्च न्यायालय व लेबर कमीशनर के यहां फरियाद के रूप में अपने केस दाखिल किए।

उच्च न्यायालय के निर्देश की पूर्णरूप से अवहेलना

जिसके फलस्वरूप दिनांक 23 नवंबर 2017 को इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ बेंच के जस्टिस  विवेक चौधरी ने केस:-सिंगल सर्विस संख्या:-1676/2014 के अपने निर्णय में कहा था। कि वादीशिक्षक,  स्कूल के प्रबन्धक को सभी आवश्यक डाक्यूमेन्ट्स के साथ । इस निर्णय की सर्टीफाइड प्रति के साथ दो सप्ताह के अन्दर ग्रेज्यूटी भुगतान हेतु प्रार्थना पत्र देंगे।  इसके साथ ही  स्कूल प्रबन्धक नियमानुसार दो माह के अन्दर इस पर निर्णय करेंगे। 07 फरवरी 2018 को दो माह की मियाद पूरी होने  पर भी आज तक एचएएल स्कूल के प्रबन्धक ने शिक्षकों की ग्रेज्युटी का भुगतान नहीं कराया है। जो कि उच्च न्यायालय के निर्देश की पूर्णरूप से अवहेलना है।

नियमों की भी खुलेआम अनदेखी

स्कूल लखनऊ का विद्यालय प्रशासन अपने द्वारा बनाए गए नियमों की भी खुलेआम अनदेखी कर रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस विद्यालय समिति के पदाधिकारी सिर्फ अपनी प्रतिष्ठा व उन्नति के लिए विद्यालय वेलफेयर हेतु एचएएल द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी प्रशासन को वापस कर देते हैं।

एचएएल स्कूल लखनऊ के शिक्षा स्तर में गिरावट

एक समय में एचएएल स्कूल लखनऊ की गिनती उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित स्कूलों में हुआ करती थी किन्तु जब से एचएएल स्कूल शिक्षा समिति में जातिगत सदस्यों को शिक्षा समिति का प्रतिनिधि बनाना शुरु हो गया, तब से दिन पर दिन स्कूल के शिक्षा स्तर में गिरावट आती चली गई। एचएएल स्कूल शिक्षा समिति अपने कर्मचारियों को वेतन,महगाई भत्ता इत्यादि को देने में भी सीबीएसई बोर्ड के नियमों का  उल्लंघन प्रारम्भ से ही करती आ रही है।

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