पवित्र ‘गाय’ मौत के बाद अछूत कैसे 

गाय
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लखनऊ । नाटक का नाम ‘ गाय ‘  तो मंचन पर शाहजहांपुर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है । पटकथा लेखक राजेश कुमार ने लिखे हैं। जरीफ मलिक आनंद द्वारा निर्देशित नाटक ‘गाय’ जाति वाद और छुआछूत फैलाने वाली व्यवस्था के ऊपर एक करारा तमाचा है।

गाय नाट्य मंचन पर रोक लगाना कमजोर सरकारी तंत्र की एक मिसाल

ब्राहमणवादी सोच, दलितों की उपेक्षा और जाति के नाम पर उनका शोषण पर कटाक्ष करती।  इस कहानी के नाट्य मंचन पर रोक लगाना कमजोर सरकारी तंत्र की एक मिसाल है। शाहजहांपुर प्रशासन की ओर से नाटक के मंचन के परिपेक्ष्य में यह फरमान जारी हुआ कि यह विषय हिंदुत्व वादी सोच को आहत करने वाला है।

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कुछ कुंठित लोगों के खिलाफ लाम बंद होकर अब अपनी आवाज बुलंद करेंगे

प्रगतिशील लोककला फाउंडेशन की सदस्य किरण सिंह, ऊषा राय बताती हैं कि शिक्षित होने के बाद भी जाति-पात का भेद फैला रहे कुछ कुंठित लोगों के खिलाफ लाम बंद होकर अब अपनी आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने बताया कि गाय नाटक की कहानी में एक ब्राहमण की गाय की मौत हो जाती है। तो वह ब्राहमण उस मृत गाय को अछूत मानकर जल्द से जल्द अपने घर से हटाने के लिये दलित को बुलाता है। दलित ब्राहमण की उस मृत गाय को हटाने से इंकार कर देता है। अब लखनऊ गोमती नगर स्थित इस नाटक शिरोज हैंगआउट रेस्तरां में इस नाटक का पाठ कलाकारों द्वारा किया जायेगा। सरकार की अनुमति मिली तो इस नाटक का मंचन भी 8 अप्रैल को किया जायेगा।

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