डिप्टी मेयर नेपाल ने कहा, बढ़ रहे हैं मानव तस्करी के मामले…

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लखनऊ। नेपाल की डिप्टी मेयर उमा थापा ने कहा कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद देश में मानव तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं। मानव तस्करी शारीरिक शोषण का अमानवीय व्यापार है, जो गैरकानूनी होने के साथ मौजूदा समय में समाज की गंभीर समस्या बनी गई है। इसे रोकने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

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मानव तस्करी की रोकथाम विषय पर संगोष्ठी…

डिप्टी मेयर उमा थापा मंगलवार को गोमतीनगर स्थित एक होटल में मानव-तस्करी की रोकथाम विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहीं थीं। यौन शोषण के लिए बच्चों की तस्करी बताया कि मानव तस्करी के मामले में 76 फीसदी महिलाएं शिकार हैं और यौन शोषण के लिए सबसे ज्यादा किशोर बच्चों की तस्करी की जाती है। इसे रोकने के लिए सरकारें प्रयासरत हैं। इंडो- नेपाल के बीच सामंजस्य स्थापित होना बेहद जरुरी है। तभी एक-दूसरे का सहयोग करके इस जिम्मेदारी को हम सभी अच्छे से निभा सकेंगे। चाइल्ड वेलफेयर नेपाल की प्रोग्राम मैनेजर मिस नमूना ने बताया कि मानव-तस्करी एक संवेदनशील मुद्दा है। मानव तस्करी से बचाने के लिए जागरूकता जरुरी है।

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बाल अधिकार विशेषज्ञ मोहम्मद आफताब ने कहा कि…

मानव तस्करी पहले रेड लाइट क्षेत्र में ही होती थी, लेकिन अब मजदूर वर्ग भी इसके शिकार हो रहे हैं। नेटवर्किंग का होना जरुरी कैरीटास की प्रोग्राम ऑफिसर लीजा ने कहा कि मानव-तस्करी को रोकने के लिए नेटवर्किंग का होना बहुत जरुरी है। डॉ. फादर ने बताया कि कैरीटास इंडिया मानव-तस्करी रोकने के साथ अन्य सामाजिक मुद्दों पर कार्य कर रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की प्रतिनिधि शबनम पांडेय ने मानव तस्करी रोकने की दिशा में संस्था द्वारा किए गए जा रहे कार्यों की सराहना की। संगोष्ठी के दौरान नेपाल की डिप्टी मेयर उमा थापा ,सेंट्रल बोर्ड ऑफीसर नमूना भुसाल सहित अन्य अतिथियों को गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया। मानव तस्करी की वजहदृगरीबी, अशिक्षा व निष्प्रभावी सरकारी नीतियां मानव तस्करी का शिकार बनने की सबसे बड़ी वजह। भारत मानव तस्करी के मामले में अपराध का गढ़ माना जाता है। मानव-तस्करी में अधिकांश बच्चे बेहद गरीब इलाकों के होते हैं।

मानव तस्करी में सबसे ज्यादा बच्चियां भारत के पूर्वी इलाकों के गांवों से आती हैं। गांवों में जाल फैलाए तस्कर गरीब बच्चियों को अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर भगाते हैं। एजेंट ही बच्चियों को घरेलू नौकर उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को बेच देते हैं। कानूनी प्रावधानइम्मॉरल ट्रैफिकिंग प्रिवेंशन एक्ट (आईटीपीए) के अनुसार यदि देह व्यापार के इरादे से मानव तस्करी होती है, तो 7 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। इसी तरह से बंधुआ मजदूरी से लेकर चाइल्ड लेबर तक के लिए विभिन्न कानून व सजा का प्रावधान है लेकिन सबसे बड़ी समस्या कानून को क्रियान्वित करने की ही है।

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