यूपी में आचार संहिता के बीच टैरिफ जारी करना बड़ा संवैधानिक संकट, राज्यपाल करें हस्तक्षेप

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लखनऊ। यूपी में आचार संहिता के बीच टैरिफ जारी करने की आयोग की कार्य प्रणाली पर उपभोक्ता परिषद ने सवाल किया है। आचार संहिता के बीच टैरिफ जारी करना बड़ा संवैधानिक संकट है। परिषद ने इस मामले राज्यपाल राम नाइक से हस्तक्षेप की मांग है।

4 जनवरी 2018 तक आयेाग के पास टैरिफ जारी करने का समय ऐसे में नियामक आयोग जैसी अर्ध न्ययायिक संस्था क्यों उड़ा रहा है। चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई जा रही है। इसकी उच्च स्तरीय जांच हो। नियामक आयोग की कार्रवाई चुनाव आयोग के लिये एक बड़ा संवैधानिक संकट व टकराव है ।

पावर कारपोरेशन के दबाव में गुरुवार को उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा आचार संहिता लागू रहते प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में व्यापक बढोत्तरी करने की तैयारी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि चुनाव आचार संहिता दो  दिन बाद खत्म हो रही है।

विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के तहत आयोग के पास चार  जनवरी 2018 तक का समय है। ऐसे में क्या हडबडी  है जो चुनाव आचार संहिता में बिजली दर बढ़ोत्तरी करायी जा रही है। नियामक आयोग भली भांति जानता है कि भारत चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रश्नावली में आचार संहिता की परिधि में विद्युत नियामक आयोग का स्पष्ट उल्लेख है।

इसके बावजूद भी एक अर्धन्यायिक संस्था द्वारा आदर्श चुनाव आचार संहिता का उलंघन करने की चेष्टा एक बहुत बडा संवैधानिक संकट है। जो प्रदेश के इतिहास में काले अक्षर से लिखा जायेगा। नियामक आयोग और चुनाव आयोग दोनों एक संवैधानिक संस्था हैं प्रदेश में इस तरह का टकराव भविष्य में संवैधानिक संकट पैदा करने की दिशा में एक बडा कदम है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा चूकि विद्युत नियामक आयोग का संवैधानिक संरक्षक राज्यपाल हैं। ऐसे में उपभोक्ता परिषद प्रदेश से संवैधानिक संकट को रोकने की मांग करता है। दो  दिन बाद चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद प्रदेश की बिजली दर यदि जारी होती तो क्या संकट खड़ा हो जाता?

इस बार विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रदेश की ग्रामीण जनता की दरों में कई गुना बढोत्तरी की साजिश की जा रही है जो कहीं न कहीं सरकार के लिये आम जनता के साथ विश्वासघात की श्रेणी में आता है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कारपोरेशन जिस आर्थिक संकट का रोना रोकर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी शीघ्र बिजली दर घोषित करने हेतु गुमराह कर रहा है अपने आप में बड़ा सवाल है ।

प्रदेश के मुख्यमंत्री जो वर्तमान में गुजरात चुनावी दौरे पर हैं ऐसे में जल्दबाजी में टैरिफ जारी कराने के पीछे प्रदेश के कुछ बडे नौकरशाहों का बड़ा षडयन्त्र है जिससे सरकार की छबि धुमिल होना स्वाभाविक है।

 

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