परिवर्तन कर करना है अच्छी दुनिया का निर्माण

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लखनऊ।  आज विश्व में अशांति है । मूल्यों का ह्रास हो रहा है। भ्रष्टाचार पापाचार बढ़ रहा है। ऐसे में मनुष्य का जीवन भी जटिल और अवसाद से भरा होता जा रहा है, परन्तु हमें हार नहीं माननी है। सबका  परिवर्तन कर अच्छी दुनिया का निर्माण करना है। इसी विषय को लेकर रविवार को प्रजापिता ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय तथा लायंस क्लब , सेंचुरी के संयुक्त तत्वाधान में सीएमएस सभागार में  ‘कॉमनेस इन केओस’  कार्यक्रम आयोजित किया गया।

अपनी कमियों के लिए दूसरे को जिम्मेदार समझना सबसे बड़ी भूल

जैसे एक कुशल डॉक्टर , मरीज के मर्ज को अच्छी तरह पकड़कर (निदान) सही इलाज कर मरीज को स्वस्थ एवं सुखी कर देता है उसी तर्ज पर मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉक्टर मोहित दयाल गुप्ता ने ( जो वर्तमान में जीबी पन्त के ह्रदय रोग विभाग में कार्यरत हैं।  एक अत्यंत गंभीर, जटिल, ज्वलंत और वैश्विक समस्या का निदान और समाधान अपने अत्यंत रोचक व प्रभावशाली शैली में किया।  डॉक्टर गुप्ता ने एक बड़ी अर्थपूर्ण पंक्ति सुनाई : लोग आइना ही नहीं देखते अगर उसमें चित्र के बजाय चरित्र दिखाई देता।  सन्दर्भ यह कि हम अपनी सभी कमियों , कमजोरियों , असफलताओं, क्रोध आदि के लिए दूसरे को जिम्मेदार समझते हैं।  ऐसा सोचना  ही सबसे बड़ी भूल है ।

नकारात्मक सोच आये तो उसे उसी समय सकारात्मक सोच में बदलें

हमारे मन में असीम शक्ति है , वह मालिक है ।  उसके पास अधिकार है कि वह क्या अन्दर आने दे  और किसे नकार दे।  अतः कैसी भी हलचल भरी परस्थितियां या वायुमंडल में कितना भी वैचारिक प्रदूषण हो , हम अपने मन को शांत व स्थिर रखें , यह हमारे ही हाथ में है।  कहते हैं न कि ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है न नष्ट पर उसे परिवर्तित तो कर सकते हैं।  हमारे सोच विचार या संकल्प ही ऊर्जा है।  अतः जब भी मन में कोई नकारात्मक सोच आये तो उसे उसी समय सकारात्मक सोच में बदल दें।  इस अभ्यास से जीवन सहज होता जायेगा।

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 परिवर्तन हम स्वयं में तो कर सकते हैं  दूसरे को नहीं

डॉक्टर गुप्ता ने कहा जैसे चीजें हमें सुख-शांति नहीं दे सकतीं वैसे ही संबंधों में भी मधुरता तब तक नहीं आ सकती जब तक हम दूसरों के बदलने का इन्तजार करते रहते हैं।  परिवर्तन हम स्वयं में तो कर सकते हैं  दूसरे को नहीं ।  अतः कभी बदला न लें बदल कर दिखायें ।  सुख, शांति, आनंद , ख़ुशी सब हमारी सोच के ही परिणाम हैं।  अतः सदा अच्छा , स्वस्थ और शुभ सोचें।  यह स्थिति लाने के लिए आवश्यक है कि हम प्रतिदिन कुछ पल अपने मन के तार ईश्वर से जोड़े , परमपिता परमात्मा का ध्यान करें, उनसे योग लगायें।   उन्होंने बताया कि हम व्यक्तियों पर अपने पूर्वाग्रह से लेबल न लगायें , बल्कि जब भी हम उनसे मिलें तो बिल्कुल शुद्ध भावना से मिनाए और यदि कार्यव्यहार में हमसे कोई गलती हो भी जाती है या हमारे व्यवहार से किसी को दुःख पहुंचा हो तो तुरंत क्षमा मांगते हुए, उन्हें शुभ भावना दें।

इस अवसर पर लायंस क्लब के गवर्नर (इलेक्ट) एके सिंह , आयुष मंत्रालय के सचिव मुकेश मेश्राम , आरके मित्तल ( सेवानिवत्र आईएएस) आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।  अतिथियों व मुख्य वक्ता डॉक्टर गुप्ता का स्वागत करते हुए गोमतीनगर शाखा इंचार्ज राधा बहन ने बताया कि प्रजापिता ब्रह्मकुमारिज ईश्वरीय विश्वविद्यालय ही विश्व का एकमात्र ऐसा विद्यालय है जहाँ नैतिक मूल्यों और अध्यात्म का ज्ञान स्वयं परमात्मा के महावाक्यों द्वारा दिया जाता है।

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