मोदी सरकार नोटबंदी पर थी असंवेदनशील, आरटीआई से खुली पोल

लखनऊ। आज से ठीक एक साल पहले जहां एक तरफ नोटबंदी के फायदों को लेकर सत्ता पक्ष द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे। तो वहीं विपक्ष ने नोटबंदी के बाद फैली अफरा-तफरी पर सरकार को आड़े हाथों लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। नोटबंदी के नफा-नुकसान पर सत्ताधारी दल और विपक्षी पार्टियों की रस्साकशी आज भी जारी है, लेकिन पर आज जब नोटबंदी की पहली वर्षगांठ है।

नोटबंदी की पहली वर्षगांठ पर आरटीआई कार्यकर्ता संजय शर्मा की एक आरटीआई ने नोटबंदी के कई दिलचस्प पहलुओं को उजागर किया है।  शर्मा ने बताया कि  बीते साल 29 दिसंबर को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर नोटबंदी के संबंध में 13 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने संजय की इस आईटीआई अर्जी को भारत सरकार के आर्थिक कार्य विभाग और राजस्व विभाग को अंतरित किया था। राजस्व विभाग ने संजय की यह आरटीआई अर्जी प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को अंतरित की। आर्थिक कार्य विभाग ने संजय की यह आरटीआई अर्जी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को अंतरित की।

आरटीआई संजय कार्यकर्ता को प्रधानमंत्री कार्यालय ने जो सूचना दी है वह बेहद दिलचस्प है। नोटबंदी के परिणामों और नोटबंदी के बाद  हुई मौतों पर मोदी सरकार की असंवेदनशीलता सामने ला रही है। नोटबंदी के बाद उजागर हुए काले धन की धनराशि, नोटबंदी के बाद देश को हुए आर्थिक नफा नुकसान, नोटबंदी के बाद बेरोजगारों की संख्या में बढ़ोत्तरी या कमी, नोटबंदी के कारण बैंकों की या लाइनों में लगने के कारण अथवा कैश की कमी के कारण हुई मौतों पर सूचना की परिभाषा में नहीं होना बताते हुए इन बिंदुओं की सूचना नहीं दी है।

संजय  ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय का यह जवाब नोटबंदी की विफलता और सरकार के आम जनता के प्रति गैर संवेदनशील रवैये  को उजागर करने के लिए पर्याप्त है।  संजय ने बताया कि सरकार से अपेक्षा होती है कि वह अपने द्वारा किये गए नए प्रयोग के परिणाम खुद ही जनता को बताएगी, लेकिन  सरकार झूंठ बोलकर मुंह छुपा रही  है।

केंद्र  सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने संजय को बताया है कि नोटबंदी के बाद या नोटबंदी करने की वजह से किसी समस्या के न होने देने के लिए केन्र्द सरकार ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का आदेश जारी करने के अलावा और कोई कदम नहीं उठाया था।  संजय को यह भी बताया गया है कि नोटबंदी करने से पहले किसी भी इकोनॉमिस्ट यानि कि  अर्थशास्त्री से सलाह तक नहीं ली गई थी। अघोषित आय प्रगटन  योजना के बारे में संजय को बताया गया है के वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना संचालित थी जो इस साल 31मार्च को बंद हो चुकी है।

बीते 31 अक्टूबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पत्र जारी कर संजय को बताया है कि चार नवंबर 2016 तक संचलन में जारी कुल नोटों का मूल्य 17.74 ट्रिलियन रुपये था, जिनमें 500 और 1000 के नोट भी सम्मिलित थे तो वही वापस प्राप्त 1000 और 500 के पुराने नोटों की संख्या के बारे में संजय को बताया गया है कि 30 जून 2017 तक वापस प्राप्त विनिर्दिष्ट बैंक नोट का आंकलित मूल्य 15.28 ट्रिलियन रुपये था। प्रवर्तन निदेशालय ने बीते 24 अक्टूबर को पत्र जारी कर आरटीआई एक्ट की धारा 24 का हवाला देते हुए संजय को सूचना देने से इंकार कर दिया है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक अन्य पत्र के माध्यम से संजय को नोटबंदी का निर्णय लिए जाने से संबंधित फाइल की नोट सीट्स, जाली नोट सरकुलेशन में होने के संबंध में प्राप्त सूचनाओं के स्रोतों,नकली नोटों का प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों में होने, नोटबंदी से पहले 2000 के और 500 के नए नोट छापने का निर्णय लेने आदि से संबंधित पत्रावली के रिकॉर्ड आदि की सूचनाओं के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1 ) और 8(1) (ह) का हवाला देते हुए सूचना देने से इंकार कर दिया है। पिछले साल दिसम्बर में मांगी गई यह सूचना उनको 10 महीने से अधिक समय बाद दी गई है। नोटबंदी पर सरकार के अपारदर्शी रुख की भर्त्सना करते हुए संजय ने देश के प्रधानमंत्री से स्वयं की सार्वजनिक करने की मांग की है।

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