NCERT की किताबें पढ़ने से सुधरेगा मदरसों के बच्चों का भविष्य : राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग

नई दिल्ली। यूपी के मदरसों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू किए जाने का जहां कुछ मुस्लिम संगठनों के विरोध कर रहे हैं । इसको खारिज करते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जानी चाहिए। ताकि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे आज के दौर की परीक्षाओं के अनुरूप तैयार हो सकें।

रिजवी ने सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों का फायदा होगा।  उन्होंने कहा कि  हर स्तर पर एनसीआरटी की किताबी पढ़ाई जानी चाहिए।  राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा होना बेहतर रहेगा। योगी सरकार के फैसले से जुड़ी इस चिंता का कोई आधार नहीं है कि सरकार मदरसों को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है। इस मामले पर किसी तरह का विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए। कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि सरकार मदरसों को अपने नियंत्रण में ले लेगी और प्रबंधन बदल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है।

सरकार की नीयत मदरसों को अपने कब्जे में लेना नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला किया कि एनसीईआरटी की अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की किताबें पढ़ाई जाएंगी। नई व्यवस्था अगले शिक्षण सत्र से लागू होगी। इनमें विज्ञान और गणित की पुस्तकें उर्दू भाषा में होंगी।

एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के लिए सरकार मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति भी करेगी। उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि मदरसों में मजहबी शिक्षा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। उन्हें केवल मुख्य धारा से जोड़ने के लिए एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत सहित कुछ मुस्लिम संगठनों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है।

उनका कहना है कि सरकार मदरसों का सहारा लेकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भागे। ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के अध्यक्ष नावेद हामिद ने कहा कि क्या सरकार मदरसों में दूसरे स्कूलों की तरह संसाधन मुहैया कराने के लिए तैयार है? ऐसा नहीं है।  वह सिर्फ अपनी जिम्मेदारी से भागना चाहती है।

शिक्षा के अधिकार कानून पर अमल करते हुए उसे मुस्लिम बहुल इलाकों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल खोलने चाहिए ताकि वहां लोग शिक्षा हासिल कर सकें।  हामिद ने कहा कि आज के समय में मदरसों में लोग धार्मिक शिक्षा हासिल करने के मकसद से ही जाते हैं।  बहुत कम बच्चे मदरसों में पढ़ते हैं।  90 फीसदी से अधिक मुस्लिम बच्चे मदरसों से बाहर दूसरे संस्थानों में शिक्षा हासिल कर रहे हैं, उनके बारे में सरकार कुछ नहीं कर रही है।

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