प्रवीण तोगड़िया और मोदी थे अच्छे दोस्त, फिर सत्ता की चाह ने बनाया जानी दुश्मन

प्रवीण तोगड़ियाप्रवीण तोगड़िया

लखनऊ। लापता हुए विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया मंगलवार को अमहमदाबाद में मीडिया के सामने आये। उन्होंने में प्रेस कांफ्रेंस कर अपने खिलाफ एनकाउंटर की साजिश रचे जाने की बात सबके सामने रखी। तोगड़िया का दावा है कि गुजरात और राजस्थान पुलिस उनका एनकाउंटर करना चाहती थी और केन्द्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियां डरा धमका रही हैं। वे अपनी जान बचाने के लिए विहिप कार्यालय से कोर्ट जाने के लिए निकले इस दौरान उनकी तबियत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि उन्होंने अपने खिलाफ साजिश रचे जाने के मामले में किसी का नाम नहीं लिया।

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तोगड़िया ने कहा कि वह हिन्दुओं की भलाई और एकता के लिए सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में उन्होंने केन्द्रीय एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाये साथ ही वह इस दौरान मीडिया के सामने रोने भी लगे।

प्रवीण तोगड़िया ने इशारों-इशारों में मोदी सरकार पर साधा निशाना

  • तोगड़िया ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में सरकार पर इशारों-इशारों में निशाना साधा।
  • उन्होंने कहा कि हिन्दुओं के हित में उठी उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
  • तोगड़िया ने केन्द्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों पर उन्हें डराने-धमकाने का आरोप लगाया।
  • इसके अलावा उन्होंने अपने खिलाफ एनकाउंटर की साजिश रचे जाने की बात कही।
  • लेकिन उन्होंने इस दौरान किसी का नाम नहीं लिया।
  • तोगड़िया ने कहा है कि समय आने पर वह सबूत के साथ उन सभी लोगों का नाम बतायेंगे जो उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
  • कहा जा रहा है कि उनका इशारा सीधे पीएम मोदी की ओर था।

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एक समय पर बहुत अच्छे दोस्त थे मोदी-तोगड़िया

  • आज के समय में तोगड़िया-मोदी के बीच मतभेद की बातें चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
  • लेकिन आज से करीब 17 साल पहले दोनों अच्छे दोस्त हुआ करते थे।
  • उनके बीच दोस्ती की शुरुआत करीब 35 साल पहले हुई थी।
  • 1980 के दशक की शुरुआत से वो दोस्त बन गए थे।
  • उस समय तोगड़िया मेडिकल के छात्र थे और उनका हिंदुत्व के प्रति आकर्षण था।
  • प्रवीण तोगड़िया 1978 में अहमदाबाद से मेडिकल की पढ़ाई के लिए अहमदाबाद के बी.जे. मेडिकल कॉलेज आए थे।
  • वह हमेशा से हिन्दू एकता को लेकर काम करना चाहते थे।
  • उनकी रूचि हिन्दुत्व के प्रचार-प्रसार में थी वह अपने काम में बखूबी लगे हुए थे।
  • नरेन्द्र मोदी और प्रवीण तोगड़िया की मुलाकात अहमदाबाद के कांकरिया विस्तार के आरएसएस की शाखा में हुई थी।
  • दोनों यहां पर शाखा से जुड़े हुए थे और के साथ आरएसएस की वेशभूषा में ‘सदा वत्सल्य मातृभूमि…’ प्रार्थना गाते थे।
  • मोदी और तोगड़िया की विचारधारा एक जैसी होने के कारण दोनों के बीच दोस्ती मजबूत होती चली गयी।
  • दोनों का ही लक्ष्य था कि हिंदुत्व का प्रचार और गुजरात में बीजेपी की सरकार बनाना।
  • इस दौरान तोगड़िया ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली, लेकिन फिर भी वह संघ के साथ जुड़े रहे।
  • वह अपने डॉक्टर की प्रेक्टिस के साथ शाखा में आते रहते थे।
  • इसके बाद जब 1985 के दौरान अहमदाबाद में संप्रदायिक आक्रोश के बीच तोगड़िया को विश्व हिन्दू परिषद् की कमान सौंपी गयी।
  • और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
  • एक तरफ जहां मोदी संघ का हिस्सा थे, वहीं दूसरी तरफ तोगड़िया परिषद् का।
  • लेकिन दोनों का लक्ष्य एक ही था दोनों के कदम एक ही दिशा में उठते थे।

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सांप्रदायिक आक्रोश ने तोगड़िया को बनाया बड़ा नेता 

  • सांप्रदायिक आक्रोश के कारण तोगड़िया का वर्चस्व बढ़ता ही गया है।
  • धीरे-धीरे वे सबके लोकप्रिय नेता बनते गये और उन्होंने हिंदुओं को विश्व हिंदू परिषद से जोड़ने की जिम्मेदारी उठायी।
  • उनसे प्रभावित होकर संघ और परिषद् ने उन्हें मंत्री से गुजरात प्रमुख बना दिया।
  • जिसके बाद वह राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं में जाने जाने लगे।
  • वहीं दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी भी अपने काम को संघ में बेहतर ढंग से कर रहे थे।
  • उनसे पहले 1987 में नरेंद्र मोदी भी संघ से निकलकर गुजरात बीजेपी के महामंत्री बन गए थे।
  • वहीं दोनो नेता अपने लक्ष्य में कामयाब होते दिखाई पड़े।
  • साल 1990 में बीजेपी गुजरात की सत्ता में आयी।
  • इसके बाद 1995 और 1998 में भी बीजेपी को जीत हासिल हुई।
  • जिसमें इन दोनों नेताओं का अहम योगदान रहा।
  • इसके बाद ही साल 1999 में राम जन्मभूमि आन्दोलन की शुरुआत हुई।
  • तब तक प्रवीण तोगड़िया गुजरात में हिन्दुओं के लिए हीरो बन चुके थे।

मोदी और तोगड़िया की मेहनत ने गुजरात में बीजेपी को दिलाई सत्ता

  • साल 1990 में बीजेपी पहली बार गुजरात की सत्ता में आयी।
  • इसके बाद 1995 में केशुभाई पटेल पहली बार गुजरात के सीएम बने।
  • उनको जीत दिलाने में दोनों नेताओं के प्रभाव की बात कही जाती है।
  • कहा जाता है कि दोनों नेता उस समय गुजरात के बड़े नेताओं के रूप में उभरे थे।
  • एक तरफ जहां मोदी आरएसएस के एक बड़े चहरे थे वहीं तोगड़िया विहिप के बड़े नेता बन चुके थे।
  • दोनों नेताओं का प्रभाव पूरे प्रदेश में था।
  • बताया जाता था कि केशुभाई पटेल भले ही सीएम बने हो, लेकिन सारे फैसले मोदी और तोगड़िया की सलाह पर लिए जाते थे।
  • उस समय तोगड़िया के घर के सामने लालबत्ती गाड़ियों की लाइन लगी होती थीं।
  • दोनों सरकार का हिस्सा होने के बावजूद राजनीति के सारे सूत्र इन दोनों नेताओं के हाथ में ही थे।
  • ये बात गुजरात के अधिकारी भी अच्छी तरह से जानते थे।
  • इस समय तक तोगड़िया इतने बड़े नेता बन चुके थे कि उन्हें जेड-प्लस सिक्योरिटी दी गयी।
  • दिसंबर 2002 में तोगड़िया ने बीजेपी के लिए 100 से भी अधिक जनसभाएं की।
  • इसके बाद बीजेपी को जीत हासिल हुई और मोदी पहले बार गुजरात के सीएम बने।

सत्ता की चाहत ने दोनों की दोस्ती को दुश्मनी में बदला

  • नरेन्द्र मोदी साल 2002 में पहली बार गुजरात के सीएम बने।
  • इसके बाद तोगड़िया के सारे अधिकार उनसे धीरे-धीरे छीन ली लिए गए।
  • प्रवीण तोगड़िया की तरफ से कहा गया कि मोदी के सीएम बनने के बाद बीजेपी में कोई उनको पूछता भी नहीं।
  • धीरे-धीरे दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते गए और दोस्ती में दरार आती गयी।
  • माना जाता है कि दोनों ही नेता देश के पीएम बनना चाहते थे।
  • दोनों ही इस लक्ष्य को प्राप्त करने की इच्छा रखे हुए थे।
  • लेकिन पीएम मोदी इस लक्ष्य कामयाब हुए और प्रवीण तोगड़िया का वर्चस्व धीरे-धीरे कम होने लगा।
  • और दोनों नेताओं में दुश्मनी पैदा हो गयी।
  • दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ सीधे तौर पर कुछ नहीं कहते।
  • लेकिन इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह देते हैं।
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