जिसे चुनाव में कांग्रेस बनाना चाहती थी सबसे बड़ा मुद्दा, इस रिपोर्ट से बीजेपी को मिली बड़ी राहत

Please Share This News To Other Peoples....

नई दिल्ली। गुजरात चुनाव से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिए टेंशन बना सोहराबुद्दीन मामले में थोड़ी सी राहत मिलने वाली खबर है। कुछ समय से इस मामले में जांच कर रहे जस्टिस लोया की मौत को लेकर सवाल उठाये जा रहे थे। लेकिन इस मामले में ‘द कैरेवेन’ की एक सनसनी फैलाने वाली रिपोर्ट का खंडन करने वाली इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने अमित शाह को बड़ी राहत पहुंचाई है।

ये भी पढ़ें:-अगर पिता जी को कुछ हुआ तो पीएम मोदी की खाल उधड़वा देंगे : तेजप्रताप यादव 

बता दें कि इस मामले में अमित शाह को क्लीन चीट दे दी गयी है। लेकिन ‘द कैरेवेन’ की एक रिपोर्ट ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में केस की सुनवाई कर रहे जज बृजगोपाल लोया की 2014 में हुई मौत पर उनकी बहन और उनके पिता से बातचीत के आधार पर कई सवाल खड़े किए गए। इस मामले में तमाम राजनीतिक दल और कुछ जजों ने इस रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस लोया की मौत की जांच की मांग की। मगर अब एक और रिपोर्ट आई है। लेकिन अब इस मामले में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की इस रिपोर्ट ने ‘द कैरेवेन’ की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने ‘द कैरेवेन’ की रिपोर्ट के इन सवालों का किया खंडन-

  1. इंडियन एक्सप्रेस ने कैरेवेन मैगज़ीन की उस बात का खंडन किया है। जिसमें ये कहा गया है कि जस्टिस लोया की तबियत ख़राब होने पर उन्हें ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले जाया गया था। जबकि इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस सुनील शुक्रे और जस्टिस भूषण गवई ने इस बात को गलत बताया।बता दें कि जस्टिस लोया 30 नवंबर, 2014 को अपने साथी जज स्वपना जोशी की बेटी की शादी के लिए नागपुर गए हुए थे। 1 दिसंबर को तड़के 4 बजे उनके सीने में दर्द हुआ। उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

    ये भी पढ़ें:-भुज में विपक्ष पर बरसे नरेन्द्र मोदी कहा कांग्रेस गुजरात तुम्हें कभी माफ नहीं करेगा 

  2. वहीं कैरेवेन मैगज़ीन की उस दूसरे का भी इस रिपोर्ट में खंडन किया गया है जिसमे कहा गया था कि डॉ. लोया को दांडे अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया। जबकि रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस गवई का कहना है कि ‘लोया अपने साथी जज श्रीधर कुलकर्णी, श्रीराम मधुसूदन मोदक के साथ ठहरे हुए थे। सुबह चार बजे उन्हें कुछ तकलीफ महसूस हुई।स्थानीय जज विजयकुमार बर्दे और उस समय बंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के डिप्टी रजिस्ट्रार रुपेश राठी उन्हें सबसे पहले दांडे अस्पताल ले गए। ये लोग दो कारों में अस्पताल पहुंचे थे।जस्टिस शुक्रे के मुताबिक, जस्टिस बर्दे जस्टिस लोया को अपनी कार में बिठाकर खुद कार चलाते हुए दांडे हॉस्पिटल ले गए थे।ये भी पढ़ें:-कांग्रेस की तीसरी लिस्ट जारी होने पर जोरदार हंगामा, वफादार विधायकों के भी काटे गए टिकट 
  3. वहीं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कैरेवेन की उस रिपोर्ट का खंडन भी किया गया। जिसमें जस्टिस लोया की बहन के हवाले से दूसरा सवाल खड़ा किया कि दांडे अस्पताल में जस्टिस लोया का ECG क्यों नहीं किया गया? उन्होंने कहा था कि अस्पताल की ECG मशीन ही खराब पड़ी थी। जबकि दांडे अस्पताल में ECG की गई थी। इस ECG की एक कॉपी भी मिली है।इस मामले में दांडे अस्पताल के डायरेक्टर पिनाक दांडे का कहाँ है कि उन्हें हमारे अस्पताल में सुबह 4.45 या 5 बजे के करीब लाया गया। तुरंत डॉक्टरों ने जज लोया को चेक किया।ECG करने के बाद ही पता चला कि उन्हें स्पेशल कार्डिएक ट्रीटमेंट की ज़रूरत है, जो हमारे अस्पताल में मौजूद नहीं था। इसलिए हमने उन्हें किसी बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। इसके बाद उन्हें मेडिट्रिना अस्पताल ले जाया गया।

    ये भी पढ़ें:-कांग्रेस को बड़ा झटका: प्रवक्ता का इस्तीफ़ा, 4000 कार्यकर्ताओं ने थामा BJP का झंडा 

  4. इस मामले में जजों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मौत को लेकर संदेह नहीं होना चाहिये जस्टिस लोया जब मेडिट्रिना अस्पताल पहुंचे ही थे कि उनका इलाज शुरू कर दिया गया था। जजों का कहाँ है कि लोया को बचाने की पूरी कोशिश की गयी मगर उन्हें बचाया न जा सका जस्टिस गवई ने बताया कि मुझे हाईकोर्ट रजिस्ट्रार का फोन आया। मैंने ड्राइवर तक का इंतजार नहीं किया और अस्पताल के लिए निकला।चीफ जस्टिस मोहित शाह और कई अन्य जज भी अस्पताल पहुंचे। हालांकि जस्टिस लोया को बचाया नहीं जा सका। मगर वहां कुछ भी ऐसा नहीं हआ था, जिस पर संदेह किया जा सके। जस्टिस शुक्रे ने भी इंडियन एक्सप्रेस को यही बात बताई।

    बोले- डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की और जजों ने भी पूरी मदद की मगर जस्टिस लोया को बचाया नहीं जा सका। जजों की राय थी कि पोस्टमॉर्टम होना चाहिए। 1 दिसंबर को सुबह 6 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनका पोस्टमार्टम करवाया गया।

    ये भी पढ़ें:-बीजेपी ने छठी लिस्ट में काटा अपने ही सीएम का पत्ता, 13 पाटीदार को मिला टिकट 

  5. साथ ही उस कैरेवेन की उस रिपोर्ट का भी खंडन किया गया है। जिसमें दावा किया गया था कि जस्टिस लोया के किसी चचेरे भाई ने उनकी बॉडी ली और सारी फॉरमैलिटी पूरी की। कैरेवेन के मुताबिक लोया परिवार का कहना था कि उन्हें आज तक इस चचेरे भाई के बारे में नहीं मालूम चला।
  6. जबकि इंडियन एक्सप्रेस ने इन रिपोर्ट्स पर साइन करने वाले शख्स प्रशांत राठी को भी खोज निकाला। राठी ने बताया कि ‘मेरे पास उस सुबह मेरे मौसा रुक्मेश पन्नालाल जकोटिया का फोन आया। उन्होंने कहा कि उनके एक कज़िन यानी जज लोया मेडिट्रिना अस्पताल में भर्ती हैं और मुझसे वहां जाकर मदद करने को कहा। मैं जब अस्पताल पहुंचा तब तक जस्टिस लोया नहीं रहे थे।मैंने मौसा को इसकी जानकारी दी। तो उन्होंने ही मुझे बाकी फॉरमैलिटी पूरी करने को कहा था। अस्पताल में उस वक्त करीब 7-8 जज मौजूद थे।जजों ने ही पोस्टमार्टम को ज़रूरी बताया था। तुरंत पास के ही सीताबर्डी पुलिस स्टेशन से एक सीनियर पुलिस अधिकारी को पंचनामे के लिए बुलाया गया था।
  7. वहीं पोस्टमॉर्टम में किसी भी तरह की गड़बड़ी की बात से इनकार किया गया पोस्टमॉर्टम नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में हुआ। रिपोर्ट में किसी तरह के ज़हर या किसी भी गड़बड़ी का सबूत नहीं मिला।डॉ. राठी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद बॉडी को लेने और डॉक्यूमेंट्स में सिग्नेचर करने के लिए वो मौके पर ही मौजूद थे।सभी फॉरमैलिटी पूरी होने के बाद जस्टिस लोया की बॉडी एक एम्बुलेंस में उनके गांव गातेगांव (लातूर) के लिए रवाना कर दी गई। साथ में दो जज और एक पुलिस कॉन्सटेबल भी भेजा गया।ये भी पढ़ें:-गुजरात चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका, कांग्रेस के युवा दल ने किया सूपड़ा साफ़
  8. जस्टिस लोया की बहन अनुराधा बियानी के कैरेवेन के रिपोर्ट मुताबिक लातूर में जब बॉडी पहुंची तो एम्बुलेंस में खाली एक ड्राइवर था। लेकिन जस्टिस गवई ने इस बात का भी खंडन किया है। उनका कहना है कि उन्होंने खुद प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज केके सोनावाने से बॉडी के साथ में दो जज भेजने को कहा था।ये दो जज योगेश रहांगडाले और स्वयं चोपड़ा थे। जस्टिस लोया की बॉडी को एयर कंडीश्नर वाली एम्बुलेंस से भेजा गया था। साथ में बर्फ की सिल्लियां भी थीं। एम्बुलेंस के पीछे-पीछे ही एक कार से दोनों जजों और एक कॉन्सटेबल को भेजा गया था। ड्राइवर हाइकोर्ट का कर्मचारी था।
  9. जब बॉडी लातूर पहुंची तो स्थानीय जज भी उनको रिसीव करने के लिए मौजूद थे। हालांकि साथ भेजे गए जज 15 मिनट बाद पहुंचे थे। जस्टिस गवई ने बताया- ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनकी कार रास्ते में कहीं खराब हो गई थी। दोनों जज फिर जस्टिस लोया के पिता से मिले थे और उनके अंतिम संस्कार होने तक वहीं मौजूद थे।

Related posts:

Video: राजधानी लखनऊ समेत कई जगहों पर हंगामा, सपा ने की चुनाव रद्द किये जाने की मांग
केंद्र में सरकार बनने पर जीएसटी को और सरल बनायेगें राहुल
लखनऊ: सिटी बस का ब्रेक फेल, 2 की मौत, सात  घायल
हार्दिक पटेल बोले- राहुल गांधी से न मिलना मेरी थी बड़ी भूल, अगर मिला होता तो....
नहीं रहे लंकापति लंकेश, सदमे में बॉलीवुड 
रूस दौरा: पीएम मोदी और पुतिन के बीच अनौपचारिक मुलाक़ात
सआदतगंज में पेन्टर की गला रेत कर हत्या, पुलिस ने दो लोगों को लिया हिरासत में
कोयलांचल में लेबर लोडिंग को लेकर आमरण अनशन जारी
अक्षय कुमार फिल्म स्टारर फिल्म “गोल्ड” का पोस्टर रिलीज
मुरैना में भीषण सडक़ हादसा, एक ही परिवार के 12 लोगों समेत 15 की मौत
अमित शाह की बिहार यात्रा पर टिकी विपक्ष निगाहें, दौरे से तय होगा गठबंधन का भविष्य
मोहनलालगंज में समाजवादी युवा चेतना साइकिल यात्रा का हुआ बेहद शानदार स्वागत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *