मोदी के मंत्री संतोष गंगवार ने उन्नाव-कठुआ गैंगरेप के विरोध को बताया बात का बतंगड़

संतोष गंगवार
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बरेली। उन्नाव-कठुआ गैंगरेप की घटना से जहां पूरे देश में गुस्सा है। तो  वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार के केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने बेहद विवादास्पद बयान दे दिया है।  केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने रेप केस पर कहा है कि इतने बड़े देश में रेप की एक-दो घटनाएं हो जाए तो बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए।

गंगवार शनिवार को बरेली में ये विवादास्पद बयान दिया है।  रेप केस पर एक सवाल में उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं, लेकिन  कभी-कभी इन्हें रोका नहीं जा सकता है।सरकार सक्रिय है सब जगह, कार्रवाई कर रही है।  इतने बड़े देश में एक-दो घटनाएं हो जाए तो बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए।

संतोष गंगवार के बेतुके बयान ने बढ़ाई नाराजगी

संतोष गंगवार का बयान ऐसे समय आया है।  जब उन्नाव और कठुआ कांड सहित पूरे देश से रेप की लगातार खबरें आ रही हैं। इतना ही नहीं इसी बीच देश-विदेश के 600 शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को चिट्ठी भी लिखी है।  उन्होंने चिट्ठी में पीएम मोदी के चुप रहने पर नाराजगी जताई है।  बतातें चलें  कि 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामलों में दोषियों को मृत्युदंड सहित सख्त सजा के प्रावधान वाले अध्यादेश पर आज राष्ट्रपति की मुहर लग गई है।

ये भी पढ़ें :-नये POCSO ऐक्ट पर राष्ट्रपति की मुहर, 12 साल तक की बच्चियों से रेप पर होगी फांसी 

राष्ट्रपति ने मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने की अदालत को इजाजत दी

केंद्र सरकार द्वारा पारित अध्यादेश पर राष्ट्रपति ने रविवार को हस्ताक्षर किये हैं।  इससे पहले शनिवार को मोदी सरकार ने इस अध्यादेश को पारित किया था।  आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), साक्ष्य कानून, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पोक्सो) में संशोधन का प्रावधान है।  इसमें ऐसे अपराधों के दोषियों के लिए मौत की सजा का नया प्रावधान लाने की बात कही गई है।  जम्मू कश्मीर के कठुआ और गुजरात के सूरत जिले में हाल ही में लड़कियों से बलात्कार और हत्या की घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय कैबिनेट ने कल उस अध्यादेश को अपनी स्वीकृति दी थी जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार करने के दोषी ठहराये गये व्यक्ति के लिये  मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने की अदालत को इजाजत दी गई है।

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