सांप्रदायिक मामलों में यूपी नंबर 1: गृह मंत्रालय

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नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने गृह मंत्रालय से पूछा कि क्या यह सच है कि पिछले तीन  साल में देश में सांप्रदायिक मामले बढ़े हैं।  यदि ऐसा है तो क्या कारण है?  साथ ही सांसद नरेश अग्रवाल ने पिछले तीन  साल में राज्यवार सांप्रदायिक मामलों का विवरण मांगा था ।  इसके जवाब में गृह मंत्रालय ने वर्ष 2015, 2016 और 2017 के दौरान सांप्रदायिक घटनाओं का राज्यवार ब्यौरा दिया है।

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2017 में उत्तर प्रदेश में हुईं 195 सांप्रदायिक घटनाएं

लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्य हंसराज गंगाराम अहिर ने कहा कि वर्ष 2017 में देश में 822 सांप्रदायिक घटनाएं हुईं, जबकि 2016 में 703 ऐसी घटनाएं हुईं और 2015 में 751 घटनाएं हुईं।  लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सबसे उत्तर प्रदेश 195, कर्नाटक 100, राजस्थान 91, बिहार 85, मध्य प्रदेश 60 शामिल हैं। इसमें सांप्रदायिकता में नंबर एक पर यूपी है। साल 2016 में  उत्तर प्रदेश में 162 मामले दर्ज किए गए थे। उस समय भी यूपी नंबर एक था। इसके बाद कर्नाटक 101, महाराष्ट्र 68, बिहार 65, राजस्थान 63 के साथ-साथ सांप्रदायिक हिंसा के मामले सामने आए। अहीर ने कहा कि घटनाओं में धार्मिक कारक, जमीन और संपत्ति के विवाद, लिंग संबंधी अपराध, सोशळ मीडिया से संबंधित मुद्दों और अन्य विविध कारण शामिल हैं।

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822 सांप्रदायिक घटनाओं में 111 लोग मारे गए

अहीर ने बताया कि 2015 में, सांप्रदायिक संघर्ष की संख्या 155 थी और 2016 में और अखिलेश यादव की अगुआई वाली समाजवादी पार्टी सरकार के तहत ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 162 हो गई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहिर ने संसद को बताया कि पिछले साल भारत में 822 सांप्रदायिक घटनाओं में 111 लोग मारे गए थे।

उत्तर प्रदेश में न्यायिक हिरासत में मौत के 365 मामले दर्ज

एक अन्य प्रश्न के जवाब में गृह मंत्रालय ने देश में न्यायिक हिरासत में होने वाली मौतों के पंजीकृत मामलों के आंकड़े बताए।  गृह मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 तक प्राप्त सूचना के आधार पर एनएचआरसी की ओर से पूरे देश में कुल 1530 मामले दर्ज किए गए। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में एनएचआरसी की ओर से कुल दर्ज मामलों में सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश से सामने आए।  उत्तर प्रदेश में न्यायिक हिरासत में मौत के 365 मामले दर्ज किए गए हैं।

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