जीत ने लिखी नई दोस्ती की पटकथा, दफन हुई 23 साल पुरानी दुश्मनी

दुश्मनी दुश्मनी

लखनऊ। यूपी की फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा को जहां जीत तो वहीं बीजेपी को करारी हार मिली है। इस जीत के साथ सपा-बसपा की 23 साल पुरानी की दुश्मनी दफन होती नजर आई।  इसका नजारा सूबे की राजधानी लखनऊ में देखने को मिला। बीएसपी सुप्रीमो मायावती को सामने देखकर जहां यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी ने झुककर उनका अभिवादन किया।  तो वहीं मायावती ने भी मुस्कुरा कर उनके अभिवादन का जवाब दिया।

1995 में बसपा के समर्थन वापस लेने से दोस्ती दुश्मनी में तब्दील हो गई

बतातें चलें कि 1993 में बीजेपी की राम मंदिर लहर को रोकने के लिए मुलायम सिंह यादव और बसपा संस्थापक कांशीराम के गठबंधन ने सफलता दर्ज की थी, लेकिन यह दोस्ती दो साल ही चली। 1995 में जब बसपा ने सपा से समर्थन वापस लिया तो ये दोस्ती दुश्मनी में तब्दील हो गई।  इसके बाद सपा विधायकों ने लखनऊ में मायावती पर गेस्ट हाउस में जानलेवा हमला किया।

बदले सियासी हालत ने  ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया दोनों पार्टियों को

इसके बाद से सपा बसपा के बीच दुश्मनी इस कदर थी कि मायावती की नजर में सपा नेता फूटी आंख नहीं सुहाते थे। 23 साल के बाद बदले सियासी हालत ने दोनों पार्टियों को ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया। जहां एक बार फिर दोनों को एक दूसरे की मदद के लिए हाथ मिलाना पड़ा।

बसपा और सपा के बीच बढ़ती दिख रही हैं नजदीकियां

उपचुनाव में बसपा के समर्थन से सपा ने फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को करारी मात दी है।  इसके बाद बसपा और सपा के बीच नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं। विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती का हाथ जोड़ अभिवादन किया ।  तो मायावती ने भी मुस्कुरा कर, हाथ जोड़कर उनके अभिवादन का जवाब दिया।  इतना ही नहीं मायावती से चौधरी ने गुफ्तगू भी करते दिखे ।

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