पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का भाजपा से मोहभंग, बोले देश का लोकतंत्र खतरे में

यशवंत सिन्हायशवंत सिन्हा

पटना । पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने पार्टी के साथ अपने संबंधों को तोड़ दिया है। इसकी घोषणा करते हुए कहा कि वह भविष्य में किसी भी पद के दावेदार नहीं होंगे। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज देश में लोकतंत्र खतरे में है।

सत्ताधारी दल ने संसद का बजट सत्र को नहीं चलने दिया: यशवंत सिन्हा

पटना में आयोजित ‘राष्ट्रमंच’ के पहले अधिवेशन को संबोधित करते हुए यशवंत सिन्हा ने कही। केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने संसद का बजट सत्र को नहीं चलने दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रही थी। इस कारण केंद्र की मोदी सरकार ने सदन में व्यवधान डाला।

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संवैधानिक संस्थाओं पर सरकार के दबाव में रहने का आरोप

चुनाव आयोग जैसे निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सरकार के दबाव में रहने का आरोप लगाया है । उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता जिस तरह चुनाव आयोग ने रद्द की थी। उस पर उच्च न्यायालय को रोक लगानी पड़ी। राष्ट्रमंच को गैर राजनीतिक संगठन बताते हुए उन्होंने कहा कि इस मंच का राजनीति से कोई मतलब नहीं है, लेकिन इसमें शामिल लोग देश में लोकतंत्र के लिए लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान स्थिति पर हम लोग चुप रहे तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।

जांच एजेंसियां भी सरकार के दबाव में कर रही हैं काम

वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्रालय का दायित्व संभालने वाले यशवंत सिन्हा ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो, आयकर विभाग जैसी जांच एजेंसियां भी सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। ऐसी स्थिति देश के लिए ठीक नहीं है। पटना में हुए इस ‘राष्ट्रमंच’ अधिवेशन में भाजपा नेता शत्रुघन सिन्हा, जद(यू) के उदय नारायण चौधरी समेत कांग्रेस की रेणुका चौधरी, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और आशुतोष व सपा नेता शामिल रहे।

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