गुणों की खान लाजवंती का पौधा

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लाजवंती नमी वाले स्थानों में ज्यादा पायी जाती है. यह एक पौधा होता है जिसके दूल काफी सुंदर होते हैं. इसका वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका है. इनके पत्ते को छूने पर ये सिकुड़ कर आपस में चिपक जाते है. इसके गुलाबी फूल बहुत सुन्दर लगते हैं और पत्ते तो छूते ही मुरझा जाते हैं इसलिए इसे छुईमुई भी कहते हैं. यह पौधा आदिवासी अंचलों में हर्बल नुस्खों के तौर पर अनेक रोगों के निवारण के लिए उपयोग में लाया जाता है. इससे कई तरह की बीमारी दूर होती है. आइये जानते हैं इसके बारे में.

* खांसी: लाजवंती में इसकी जड़ के टुकड़ों की माला बना कर गले में पहन लो. इसके अलावा इसकी जड़ घिसकर शहद में मिलाकर इसको चाटने से खांसी ठीक होती है.

* स्तनों का ढीलापन: छुईमुई और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर पीस कर और लेप को ढीले स्तनों पर हल्के हल्के मालिश किया जाए तो स्तनों का ढीलापन दूर होता है.

* खूनी दस्त: छुईमुई की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दही के साथ खूनी दस्त से ग्रस्त रोगी को खिलाने से दस्त जल्दी बंद हो जाती है.

* त्वचा संक्रमण: छुईमुई की पत्तियों और जड़ों में एंटीमायक्रोबियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं त्वचा संक्रमण होने पर इसकी पत्तियों के रस को दिन में 3 से 4 बार लगाएं.

* टांसिल्स:  इसकी पत्तियों को पीसकर गले पर लगाने से जल्द ही समस्या में आराम मिलता है. प्रतिदिन 2 बार ऐसा करने से तुरंत राहत मिल जाती है.

* नपुंसकता: तीन से चार इलायची, छुईमुई की जड़ें 2 ग्राम सेमल की छाल (3 ग्राम) को आपस में मिलाकर कुचल लिया जाए और इसे एक गिलास दूध में मिलाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले पिया जाना चाहिए, यह नपुंसकता दूर करने में सहायक है.

* पेशाब का अधिक आना: लाजवंती के पत्तों को पानी में पीसकर नाभि के निचले हिस्से में लेप करने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है. 

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