सीता को रावण की चंगुल से छुड़ाने के बाद यहां आए थे श्रीराम

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हिंदू धर्म में कई धार्मिक स्थान है जिनमें से कई बेहद पवित्र माने गए हैं। हर स्थान की अपनी ही खासियत है। मान्यता के अनुसार जब-जब, जहां-जहां इस धरती पर संकट आया है तब-तब भगवान विष्णु ने पापो के नाश के लिए विभिन्न स्वरूपों में अवतरित हुए हैं। मान्यता है कि जिस-जिस स्थान पर भगवान के चरण पड़े वहां-वहां धार्मिक स्थान स्थापित हो गए। आज हम आपको एक ऐसे ही स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जो चार धामों में से एक माना जाता है, जिसे विष्णु जी का धाम कहा जाता है।

आइए जानते हैं इस धाम के बारे में-

भगवान विष्णु जी के इस धाम को श्री रंगम मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में कावेरी नदी के तट पर स्थित है। यहां विष्णु भगवान की रंगनाथ के रूप में पूजा की जाती है। इस मंदिर का नज़ारा अत्यंत भव्य है। इस स्थान के निर्माण संबंधी कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं।

हिंदू मान्यताओं की एक कथा के अनुसार वैदिक काल में गोदावरी नदी के तट पर गौतम ऋषि का आश्रम था। जल की काफ़ी कमी के कारण जल की तलाश में एक दिन कुछ ऋषि गौतम ऋषि के आश्रम आए। गौतम ऋषि ने सभी ऋषियों को सम्मान पूर्वक भोजन कराया। उपजाऊ भूमि की लालच में ऋषियों ने मिलकर छल द्वारा गौतम ऋषि पर गौ हत्या का आरोप लगा दिया और उनकी सारी ज़मीन पर कब्जा कर लिया।

इसके बाद गौतम ऋषि ने श्रीरंगम जाकर श्री रंगनाथ की आराधना की और उनकी सेवा करनी शुरू कर दी। सेवा से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें दर्शन दिए और पूरा क्षेत्र उनके नाम कर दिया। ये भी कहा जाता है कि गौतम ऋषि के कहने पर ही स्वयं ब्रह्मा जी ने इस मंदिर का निर्माण किया था। इस मंदिर के बारे में एक और मान्यता यह भी है कि विष्णु अवतार भगवान श्री राम ने  लंका से लौटने के बाद यहां पूजा की थी। 

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