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योगी सरकार का खेल प्रतिभाओं को बड़ा तोहफा, लखनऊ में बन रहा स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर

Sports Science and Injury Management Centre being built in Lucknow

Sports Science and Injury Management Centre being built in Lucknow

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रही है। राजधानी लखनऊ स्थित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना की जा रही है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, खेल संबंधी चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन में सुधार के लिए वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।

सेंटर के निर्माण के बाद प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल संबंधी चोटों के इलाज और आधुनिक पुनर्वास के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे खिलाड़ियों को समय पर उपचार मिलने के साथ उनकी रिकवरी और खेल में वापसी की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

फिटनेस से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक एकीकृत व्यवस्था-

स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का उद्देश्य केवल घायल खिलाड़ियों का उपचार करना नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता का नियमित वैज्ञानिक मूल्यांकन और प्रदर्शन में निरंतर सुधार करना भी है। सेंटर में खिलाड़ियों को फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स साइंस आधारित प्रशिक्षण, पोषण संबंधी परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मार्गदर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से खिलाड़ियों की फिटनेस का वैज्ञानिक आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण और रिकवरी की रणनीति तैयार की जा सकेगी। चोट के बाद पुनर्वास से लेकर मैदान पर वापसी तक खिलाड़ियों को विशेषज्ञों की निगरानी में सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा तैयार-

स्पोर्ट्स सांइस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना के लिए शासन द्वारा 716.77 लाख रुपये (7.17 करोड़ रुपये) की स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना के माध्यम से खिलाड़ियों के लिए आधुनिक चिकित्सा, पुनर्वास और खेल विज्ञान से जुड़ा मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अभी तक ऐसा सेंटर नहीं था। इसमें बाहर के लोगों को भी इलाज की सुविधा दिए जाने का प्रस्ताव है। फीस देकर आमजन भी अपनी चोटों का इलाज और पुनर्वास करा सकेंगे।

सात अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा सेंटर-

खिलाड़ियों के उपचार और रिकवरी के लिए सेंटर में सात प्रमुख अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। इनमें हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर, रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस, टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण, वायवीय संपीडन चिकित्सा इकाई, कॉम्बो पेन मैनेजमेट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट, क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणासी, फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट शामिल हैं। 

हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर सुविधा में तरल नाइट्रोजन के स्थान पर बिजली से संचालित क्रायोथेरेपी कक्ष की सुविधा होगी। इसमें -120°C से -140°C तक तापमान सीमा उपलब्ध होगी। जबकि रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस दो एकीकृत कंप्रेसर के माध्यम से उच्च आवृत्ति, 20 Hz तक के इम्पल्स देने में सक्षम होगा। इसका डिजाइन आधुनिक और उपयोग में आसान बताया गया है। वहीं टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण उच्च आवृत्ति इलेक्ट्रोथेरेपी के जरिए गहरे ऊतकों के उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से विभिन्न प्रकार की उपचार प्रणालियां उपलब्ध होंगी, जिनमें धाव, टैडन, लिगामेंट, जोड़ तथा मांसपेशियों के उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

वायवीय संपीड़न चिकित्सा इकाई (प्न्यूमैटिक कंप्रेशन थेरेपी यूनिट) के माध्यम से दोनों पैरों, भुजाओं, कमर एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों का एक साथ उपचार किया जा सकेगा। खिलाड़ियों के रिकवरी और पुनर्वास में यह उपयोगी होगा। कॉम्बो पेन मैनेजमेंट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट में समकालिक, वैकल्पिक, पृथक एवं क्रमिक चैनल मोड में इलेक्ट्रोस्टिमुलेशन की सुविधा होगी। इसके जरिए गैल्वैनिक, फैराडिक, ट्रेबर्ट, अल्ट्रा राइज, हाई वोल्ट, माइक्रो करंट तथा टीईएनएस जैसी विभिन्न करंट थेरेपी उपलब्ध होगी।

क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणाली में 2 इंच या उससे अधिक बैकलिट टच स्क्रीन डिस्प्ले और क्लास-4 जीएएआईएएस डायोड लेजर स्रोत होगा। इसकी न्यूनतम 10 वाट या उससे अधिक आउटपुट क्षमता होगी। फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट में मायोफेशियल ट्रिगर प्वाइंट, पीठ दर्द और गर्दन दर्द आदि के उपचार में उपयोगी होगा। इसके जरिए कैल्सिफिक टेंडिनोपैथी जैसी समस्याओं के उपचार में भी सहायता मिलेगी।

निर्माण कार्य प्रगति पर, उपकरणों की खरीद जल्द-

स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का सिविल निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान उपकरणों की खरीद के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया के बाद उपकरणों की खरीद की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

परियोजना को कार्य प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सेंटर के तैयार होने के बाद खिलाड़ियों को उपचार, रिकवरी और प्रदर्शन सुधार के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध होगी।

प्रशिक्षकों और खेल विशेषज्ञों की भी बढ़ेगी क्षमता-

इस सेंटर को खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों, खेल अधिकारियों और खेल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के लिए भी क्षमता विकास के मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे खेल से जुड़े मानव संसाधन को भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और चोट प्रबंधन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।

स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर महत्वपूर्ण पहल-

प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ-साथ अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन से जुड़ी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी।

-कुमार विनीत, विशेष सचिव, खेल विभाग

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