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सिक्किम टनल हादसे में अबतक 10 की मौत, ज़हरीली गैस और खराब मौसम के बीच रेस्क्यू जारी

10 dead so far in Sikkim tunnel accident.

10 dead so far in Sikkim tunnel accident.

गंगटोक। सिक्किम के नाम्ची जिले के समरदुंग क्षेत्र में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग (टनल) (Sikkim Tunnel Accident) में हुए हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। प्रशासन ने आशंका जताई है कि टनल के भीतर अभी भी कई मजदूर फंसे हो सकते हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य पुलिस, दमकल और अन्य राहत एजेंसियां लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रही हैं।

नाम्ची जिले की पुलिस अधीक्षक सोनाम डोल्मा भोटिया ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि अब तक टनल से 10 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सात मृतकों की पहचान कर ली गई है, जबकि तीन शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। पहचान किए गए मृतकों में तीन पश्चिम बंगाल, जबकि एक-एक सिक्किम, उत्तराखंड, पंजाब और असम के निवासी हैं।

उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन मृतकों के परिजनों से लगातार संपर्क में है। जिन परिवारों से संपर्क स्थापित हो चुका है, उन्हें सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मंगलवार को शव सौंप दिए जाएंगे। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत एवं बचाव कार्य पर केंद्रित है। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच बचाव अभियान पूरा होने के बाद की जाएगी।

भोटिया ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश ने राहत कार्य को बेहद कठिन बना दिया है। बारिश के कारण टनल में बड़ी मात्रा में पानी भर गया था, जिसके चलते कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा। पानी निकालने के बाद अभियान दोबारा शुरू किया गया, लेकिन खराब मौसम, फिसलन और सीमित दृश्यता अब भी राहत कार्य में बाधा बन रही है।

उन्होंने बताया कि टनल के भीतर गैस रिसाव की आशंका को देखते हुए पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर और आसनसोल से विशेषज्ञों की एक तकनीकी टीम सिक्किम पहुंच रही है। विशेषज्ञ टनल के भीतर मौजूद गैस की प्रकृति और रिसाव के कारणों की वैज्ञानिक जांच करेंगे। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

इस बीच, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट विवेक कुमार ने बताया कि हादसे का स्थान टनल के प्रवेश द्वार से लगभग डेढ़ किलोमीटर भीतर है, जिससे राहत अभियान और अधिक जटिल हो गया है। संकरी सुरंग, सीमित ऑक्सीजन, जहरीली गैस की आशंका और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां बचावकर्मियों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों की सुरंगों में सामान्यतः मीथेन गैस पाई जाती है, लेकिन प्रारंभिक जांच में टनल के भीतर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। यह गैस अत्यंत विषैली होती है और इसके कारण बचाव दल को विशेष सुरक्षा उपकरणों के साथ बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ रहा है।

विवेक कुमार ने बताया कि एनडीआरएफ की टीम सोमवार शाम करीब पांच बजे से राज्य की विभिन्न एजेंसियों के साथ संयुक्त रूप से राहत अभियान चला रही है। अब तक 10 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अन्य संभावित रूप से फंसे मजदूरों की तलाश लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि जब तक टनल के भीतर किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना बनी रहेगी, तब तक खोज एवं बचाव अभियान बिना रुके जारी रहेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्राथमिकता हर संभव तरीके से फंसे हुए मजदूरों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों और संभावित लापरवाही की जांच बचाव अभियान समाप्त होने के बाद विस्तृत रूप से की जाएगी। पूरे घटनाक्रम पर राज्य सरकार लगातार नजर बनाए हुए है और राहत कार्य में लगी सभी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

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