नई दिल्ली। कांगो के बुकावु शहर में बृहस्पतिवार को उस समय दहशत फैल गई, जब एम23 विद्रोही ग्रुप के नेताओं की रैली में हुए विस्फोट (Explosion) में 11 लोगों की मौत हो गई और 65 घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। कांगो में सक्रिय इस विद्रोही संगठन ने सरकार पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
कांगो रिवर अलायंस (एएफसी) के नेता कॉर्नेल नांगा ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि इस हमले में 11 लोगों की जान चली गई और इसकी जांच जारी है। उन्होंने बताया कि घायलों में से छह की हालत गंभीर है और उनका इलाज किया जा रहा है। विस्फोट उस समय हुआ जब नांगा समेत एम23 के नेता बुकावु में लोगों से मुलाकात कर रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि विस्फोट के बाद लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे, जबकि कई शव खून से लथपथ पड़े हुए थे।
एम23 विद्रोहियों ने इस हमले का आरोप सीधे कांगो सरकार पर लगाया है। एएफसी ने एक बयान में कहा कि हम किंशासा की सरकार पर इस हमले की साजिश रचने का आरोप लगाते हैं। यह हमला नागरिक आबादी को खत्म करने की एक सोची-समझी योजना का हिस्सा है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस हमले के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
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कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसीकेदी ने इस हमले को एक आतंकवादी हमला कहा और आरोप लगाया कि यह हमला कांगो की धरती पर अवैध रूप से मौजूद विदेशी सेना ने अंजाम दिया है। उन्होंने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उनकी सरकार इस घटना की बड़े लेवल पर जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, एम23 विद्रोही समूह को पड़ोसी देश रवांडा से सैन्य समर्थन मिल रहा है और लगभग 4,000 सैनिक इस संगठन के लिए लड़ रहे हैं। विद्रोहियों ने अब तक कांगो में कई प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया है और हजारों निर्दोष लोगों की जान ले ली है। इस बढ़ते संघर्ष के कारण हजारों लोग अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं, जिससे इलाके में मानवीय संकट गहरा गया है।