सुप्रीम कोर्ट में निर्भया केस में दोषी विनय की याचिका खारिज

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नई दिल्ली। वर्ष 2012 में दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दया याचिका की अस्वीकृति को चुनौती देने वाली मौत के दोषी विनय कुमार शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि विनय मनोवैज्ञानिक रूप से फिट है और उसकी मेडिकल हालत स्थिर है।

शीर्ष अदालत ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया, उसे याचिका को योग्यता से रहित पाया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषी विनय शर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने दया याचिका को खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी। इस तरह से अब निर्भया के तीन दोषियों के सभी कानूनी विकल्प पूरी तरह से खत्म हो गए हैं।

विनय की अदालत में दलील: मैं खेती करने वाले परिवार से, आदतन अपराधी नहीं

विनय शर्मा के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया कि उनके मुवक्किल को जेल में लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी, इसके अलावा उसे कई तरह की दवाएं भी दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में पहली बार चार युवाओं को फांसी दी जा रही है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। इस पर अदालत ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि वह कानूनी बिंदुओं पर ही बात करें। तब एपी सिंह ने अदालत से कहा, विनय का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह आदतन अपराधी नहीं है, बल्कि एक खेती करने वाले परिवार से है।

जस्टिस भानुमति ने कहा कि यह दस्तावेज आपके लाभ के लिए नहीं है, यह अदालत की संतुष्टि के लिए

वहीं, वकील एपी सिंह ने कहा कि मैं अन्याय को रोकना चाहता हूं, आधिकारिक फाइल पर गृह मंत्री और एलजी के दस्तखत का नहीं हैं, इसलिए मैं फाइल का निरीक्षण करना चाहता हूं। मैंने इसके लिए आरटीआई दाखिल की है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज व्हाट्सऐप से मंगाया गया है। इस पर जस्टिस भानुमति ने कहा कि यह दस्तावेज आपके लाभ के लिए नहीं है, यह अदालत की संतुष्टि के लिए है।

मेहता ने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सभी स्थिति साफ

जस्टिस अशोक भूषण ने एपी सिंह ने कहा कि आप ये सब बताने की बजाय सिर्फ अपनी कानूनी दलीलें रखें। विनय शर्मा की ओर से जब एपी सिंह ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अदालत के फैसले, मेडिकल रिपोर्ट, परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को राष्ट्रपति के सामने रखा गया था। उसी के बाद दया याचिका खारिज हुई है। ऐसे में ये दलील नहीं दी जा सकती है।

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