35 अरब की मनी लांड्रिंग का मामला: पूर्व राष्ट्रपति और उनकी बहन भगोड़ा करार

पूर्व राष्ट्रपति
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इस्लामाबाद। जांच एजेंसी (एफआईए) ने 35 अरब रुपये के मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उनकी बहन को दोषी मानते हुए भगोड़ा घोषित किया है। एफआईए ने पूर्व राष्ट्रपति व उनकी बहन के  आलावा अन्य संदिग्धों को भी इस मामले में भगोड़ा करार कर दिया है।

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अब पूर्व राष्ट्रपति पर लटकी तलवार

बताते चलें कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी की भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तारी के बाद वहां की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) की तलवार अब वहां के पूर्व राष्ट्रपति पर लटकी हुई है। पाकिस्तानी के एक अखबार के मुताबिक संघीय जांच एजेंसी ने जरदारी के सहयोगी और प्रतिष्ठित बैंकर हुसैन लवाई और अन्य संदिग्धों को अदालत के समक्ष पेश किया।

हुसैन लवाई ने की थी फर्जी खाता खुलवाने की पैरवी

मालूम हो कि हुसैन लवाई पर आरोप है कि उन्होंने समिट बैंक, सिंध बैंक और यूनाइटेड बैंक लिमिटेड जैसे बैंकों करीब 29 फर्जी खाते खुलवाने की पैरवी की थी। इस मामले में पुलिस ने जो शिकायत दर्ज की है उसके मुताबिक अरबों रुपये फर्जी खाते में जमा कराए गए हैं, जिसे बाद में इस जरदारी और उनकी बहन की कंपनी जरदारी ग्रुप तक पहुंचाया गया।

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सभी आरोपियों को चालान कटा

बता दें कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की सह अध्यक्ष और जरदारी की बहन फरयाल तलपुर के साथ एक प्राइवेट बैंक के अध्यक्ष और बाकी 18 लोगों को भगोड़ा घोषित किया गया है। इन सभी आरोपियों का चालान भी काटा गया है। अब संघीय जांच एजेंसी उन पर कार्यवाई करने की तैयारी कर रही है।

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