लखनऊ। विद्युत कर्मचारी मोर्चा संगठन का 43वां अधिवेशन (43rd convention of electrical workers ) 17 नवम्बर को होगा। इस अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक होंगे, जबकि सेमिनार में मुख्य अतिथि के तौर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह रहेंगे। इस अधिवेशन में संगठन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन की भी रूपरेखा बनाएगा।
संगठन के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश अवस्थी ने पत्रकारों को बताया कि बिजली विभाग को तीन भागों में करने के बाद उसका पतन हो रहा है। उसका काम सही से नहीं हो पा रहा है। इसके लिए संगठन कई बार सरकार को अवगत करा चुका है, लेकिन कर्मचारियों का उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि हर कर्मचारी इस समय अपने हितों के लिए संगठन की ओर देख रहा है। 17 को होने वाले अधिवेशन में निर्णायक आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इसके लिए 146 देशों के ऊर्जा क्षेत्रों के संगठनों का नैतिक समर्थन प्राप्त हो चुका है।
जिन बिंदुओं पर वार्ता होनी है, उसमें प्रमुख रूप से सरकार की निजीकरण की सोच समाप्त करना। सेस कर्मचारियों को अप्रैल 1997 से पावर कारपोरेशन में संविलिनीकरण करते हुए पुरानी पेंशन योजना को लागू कर संविदा को एक लाख साठ हजार पदों के विरुद्ध नियमित सेवा में लिया जाना आदि शामिल है।
प्रदेश की बिजली व्यवस्था के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन की तैयारी
प्रेस वार्ता में वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरजू त्रिवेदी, महामंत्री इंजीनियर मोहन श्रीवास्तव,कोषाध्यक्ष आलोक कपूर, कन्हैयालाल, ए.के. माथुर,रामशंकर, सुनील शुक्ला और सुरेश शाह आदि उपस्थित रहे।