• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

नेपाल में राजनीतिक उठापटक

Writer D by Writer D
24/12/2020
in Main Slider, अंतर्राष्ट्रीय, ख़ास खबर, राजनीति, विचार
0
14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अचानक संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को बर्खास्त कर दिया। अभी उनके पांच साल के कार्यकाल का तीसरा वर्ष भी नहीं पूरा हुआ है। राष्ट्रपति ने विद्या देवी भंडारी ने भी संसद के निवले सदन को भंग किए जाने पर अपनी मुहर लगा दी है।

पार्टी में ओली को जिस तरह के अंतर्विरोधों का सामना करना पड़ रहा था, उसे देखते हुए उनके इस कदम पर शायद ही कोई आश्चर्य हो। उन्होंने भारत के खिलाफ मोर्चा खोलकर अपनी पार्टी के लोगों को नाराज कर दिया था। अयोध्या को नेपाल की बताकर और मानचित्र में छेड़छाड़कर उन्होंने अपने ही दल में अपने लिए परेशानी मोल ले ली थी। प्रचंड एंढ कंपनी ने तो उसी समय उनके खिलाफ मोर्चा खोल दी थी। चीन के प्रयास से उस समय तो मामला दब गया था लेकिन आक्रोश का नासूर अंदर ही अंदर पार्टी में पलता रहा।

पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदर उनके इस्तीफे की मांग तेज होती जा रही थी जिसकी वे लगातार अनदेखी कर रहे थे। असंतोष को टालने का एक ही मार्ग है कि संवाद स्थापित किया जाए और वैचारिक गतिरोध को दूर करने का प्रयास किया जाए लेकिन ओली अपनी हठधर्मिता पर अड़े रहे। नतीजा यह हुआ कि सत्तारूढ़ नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएन) के 91 सांसदों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया, जिसके बाद उन्होंने प्रतिनिधि सभा भंग कर अगले साल चुनाव कराने की घोषणा कर दी। इस फैसले को हालांकि सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, लेकिन वहां से फिलहाल कोई आदेश नहीं आया है। लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहे नेपाल के लिए किसी प्रधानमंत्री का कार्यकाल पूरा न कर पाना कोई नई बात नहीं है।

अपनी ही पार्टी से ‘बेदखल’ हुए पीएम ओली! प्रचंड बने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वेसर्वा

1990 से 2008 तक चले संवैधानिक राजतंत्र के दौर में भी हाल यही था और 2008 में राजशाही के खात्मे के बाद भी नेपाल में किसी प्रधानमंत्री ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। हर साल दो साल पर प्रधानमंत्री बदल देना वहां आम बात है। इस लिहाज से ओली सरकार का गिरना कोई बड़ी बात नहीं। बड़ी बात यह है कि उनकी पार्टी को प्रतिनिधि सभा में जबर्दस्त बहुमत हासिल था और सभा को भंग करने की सिफारिश किए जाते वक्त भी इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया था। संसद में बहुमत को लेकर कोई परेशानी नहीं थी तो प्रतिनिधि सभा की बैठक में ओली सरकार की जगह बड़ी आसानी से सीपीएन के ही किसी अन्य नेता की अगुआई में दूसरी सरकार बनाई जा सकती थी। इसके बावजूद संसद का प्रतिनिधित्व करने वाली ओली सरकार ने उसे भंग कर देश पर समय से पहले चुनाव लादने का फैसला कर लिया, जो संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है और आमली की जिद का परिचायक है। इस कदम को  उठानेके बाद शायद लोकतंत्र में ओली को गंभीर नेता के तौर पर प्रतिष्ठा न मिले।

CM योगी का एक्शन, मथुरा छात्रवृत्ति घोटाले में समाज कल्याण अधिकारी सस्पेंड

दरअसल इस फैसले से भारत के घरेलू राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए ओली पर राष्ट्रवादी भावनाओं का उन्माद फैलाने की कोशिश के आरोपों की भी पुष्टि हुई है। गौरतलब है कि उन्होंने न केवल भारत पर ऊलजलूल आरोप लगाए बल्कि नए-नए विवाद भी पैदा किए। इससे दोनों देशों के रिश्ते तो प्रभावित हो ही रहे हैं, नेपाल के राष्ट्रीय हितों का भी नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट से जब तक कोई अप्रत्याशित फैसला नहीं आता तब आगामी चुनावों तक सरकार की कमान ओली के हाथों में ही रहेगी। यह और बात है कि दल ने उन्हें सीएनएन के पद से हटाए जाने की घोषणा कर दी है। कुल मिलाकर यह कहा जाए कि ओली न तो अपनी पार्टी के मजबूत स्तंभ रहे और न ही सरकार के।

कहना मुश्किल है कि इस दौरान चुनावी फायदे के लिहाज से वह कब किस तरह का विवाद खड़ा कर देंगे। जाहिर है, नेपाल के लोगों के लिए ही नहीं, भारत सरकार के लिए भी यह अतिरिक्त सतर्कता बरतने का समय है। भारत को देखना होगा कि चुनाव में कौनसी पार्टी जीत कर आती है और वह भारतीय हितों की कसौटी पर कितना खरा उतरती है।

Tags: "Nepal Communist Partyasian countries Headlinesasian countries Newsasian countries News in Hindihouse dissolution in nepalhouse dissolution in nepal recommendKP Sharma OliLatest asian countries NewsNepalnepal crisisnepal political crisisPushpa Kamal Dahalvidya devi bhandariWorld Hindi NewsWorld News in Hindiकेपी शर्मा ओलीखड्ग प्रसाद शर्मा ओलीनेपाल में संकटनेपालको सङ्घीय संसदनेपाली संसद भंग करने की सिफारिशपुष्प कमल दहलपुष्पकमल दाहालबाकी एशिया Samachar
Previous Post

प्रगतिशील किसान उन्नत खेती करके देश के विकास में सहभागी बन रहे हैं : योगी

Next Post

सरकार के लिए ‘उपभोक्ता देवो भवः’ की नीति सर्वोपरि : श्रीकांत शर्मा

Writer D

Writer D

Related Posts

Digital Census
राजनीति

उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना का पहला चरण 25 अप्रैल से हाेगा शुरू

24/04/2026
Yogi Government
Main Slider

योगी सरकार का बड़ा फैसला: कम लोड वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

24/04/2026
CM Yogi
उत्तर प्रदेश

यूपी में “लैब टू लैंड” की अवधारणा धरातल पर: मुख्यमंत्री

24/04/2026
AK Sharma
उत्तर प्रदेश

एके शर्मा का बड़ा फैसला: कम लोड वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

24/04/2026
Egg Chapati
Main Slider

आज बनाएं अंडा चपाती, 10 मिनट में होगा तैयार

24/04/2026
Next Post
shrikant sharma

सरकार के लिए 'उपभोक्ता देवो भवः' की नीति सर्वोपरि : श्रीकांत शर्मा

यह भी पढ़ें

जनता जनार्दन के आशीर्वाद से जनता की सेवा करने का पुनः मौका मिला : सीएम धामी

11/04/2022

SSC SI पेपर-1 परीक्षा का रिजल्ट आज होगा जारी, ऐसे करें चेक

26/02/2021
cisf

CISF कॉन्स्टेबल ट्रेड्समेन एग्जाम के एडमिट कार्ड जारी, देने होंगे इतने जवाब

18/10/2023
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version