• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

जेष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत कब है, जानें शुभ मुहूर्त

Writer D by Writer D
15/05/2025
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
0
Shani Pradosh Vrat

Shani Pradosh Vrat

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का वर्णन शिव पुराण में मिलता है। कहते हैं कि इस व्रत को करने से साधक की सभी मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त संकटों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा अविवाहितों के विवाह के योग बनने के साथ मनपसंद जीवन साथी भी मिल सकता है, तो आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत कब है।

जेष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 24 मई को शाम 7 बजकर 20 मिनट पर होगी । वहीं तिथि का समापन अगले दिन यानी 25 मई को 3 बजकर 51 मिनट पर होगी। इस दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। ऐसे में ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत 24 मई को रखा जाएगा।इस बार प्रदोष व्रत शनिवार के होने की वजह से यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा।

जेष्ठ प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ प्रदोष व्रत के दिन भोलेनाथ की पूजा का शुभ मुहूर्त की शुरुआत शाम 7 बजकर 20 मिनट पर होगी। वहीं तिथि की समापन रात्रि 9 बजकर 19 मिनट पर होगा। इस दौरान भक्तों को सिर्फ 2 घंटे 1 मिनट का समय मिलेगा।

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवों के देव महादेव को समर्पित इस व्रत को करने से यह प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते है और उन्हें शिव धाम की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार चंद्रमा को क्षय रोग था, जिसके चलते उन्हें मृत्यु तुल्य कष्ट हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन फिर से जीवन प्रदान किया। इसलिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा।

Tags: shani pradosh vrat
Previous Post

अपरा एकादशी के दिन बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा, करें ये एक उपाय

Next Post

इस दिन से धरती पर आग उगलेगा सूरज, जानें कब से शुरू होगा नौतपा

Writer D

Writer D

Related Posts

CM Yogi
Main Slider

जनता का पैसा जनहित में ही खर्च होगाः सीएम योगी

26/05/2026
Nautapa
Main Slider

नौतपा में करें ये अचूक उपाय, पैसों से भर जाएगा घर

26/05/2026
Kesahv Prasad Maurya
Main Slider

2047 तक ‘वनवास’ पर रहेगा विपक्ष, कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों का एनकाउंटर जारी रहेगा: डिप्टी सीएम

26/05/2026
Harmanpreet Kaur
Main Slider

हरमनप्रीत कौर को पद्म श्री सम्मान, इंग्लैंड तक दिखा जश्न

26/05/2026
Divyanka Tripathi gave birth to twins
Main Slider

‘इशिता भल्ला’ के घर आए ‘करण-अर्जुन’, दिव्यांका त्रिपाठी ने दिया जुड़वां बच्चों को जन्म

26/05/2026
Next Post
Nautapa

इस दिन से धरती पर आग उगलेगा सूरज, जानें कब से शुरू होगा नौतपा

यह भी पढ़ें

shot

युवक की सिर में गोली मारकर हत्या

26/03/2022
Indira Ekadashi

कब रखा जाएगा इंदिरा एकादशी व्रत, जानें मुहूर्त

08/10/2023
bihar election 2020

बिहार इलैक्शन 2020 को लेकर एलजेपी की बैठक आज

07/09/2020
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version