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UCC Ordinance लागू, लिव-इन रिलेशनशिप पर कानून हुआ और सख्त

Writer D by Writer D
27/01/2026
in Main Slider, उत्तराखंड, राजनीति, राष्ट्रीय
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UCC

UCC

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उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के कई प्रावधानों में सुधार के लिए एक संशोधन अध्यादेश लागू किया। इस अध्यादेश में शादी और लिव-इन रिलेशनशिप में जबरदस्ती करने और धोखाधड़ी जैसे मामलों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने से लेकर लगभग डेढ़ दर्जन बदलाव किए गए हैं। उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2026, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की मंजूरी मिलने के बाद तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। राज्य सरकार UCC 2024 में जरूरी संशोधनों के लिए यह अध्यादेश लाई है।

अधिकारियों के मुताबिक, इन संशोधनों का मकसद UCC के प्रावधानों को ज्यादा स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना है। इसके साथ ही प्रशासनिक दक्षता को मज़बूत करना है ताकि, नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि अध्यादेश शादी के समय पहचान छिपाने को शादी रद्द करने का आधार बनाता है, जबकि शादी और लिव-इन रिलेशनशिप में ज़बरदस्ती, दबाव, धोखाधड़ी या गैर-कानूनी कामों के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

विधवा शब्द को जीवनसाथी में बदलने का प्रावधान

अधिकारियों ने बताया कि लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर रजिस्ट्रार ने टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी करने और विधवा शब्द को जीवनसाथी से बदलने का प्रावधान किया गया। उन्होंने बताया कि अध्यादेश रजिस्ट्रार जनरल को शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और विरासत से संबंधित रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार देता है। इसके अलावा, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय दंड संहिता, 2023 लागू की गई है।

इसमें यह भी प्रावधान है कि यदि सब-रजिस्ट्रार तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई करने में असफल रहता है, तो मामले स्वचालित रूप से रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल को भेज दिए जाएंगे। अध्यादेश सब-रजिस्ट्रार पर लगाए गए जुर्माने के खिलाफ अपील करने का अधिकार देता है और जुर्माने की वसूली भूमि राजस्व के रूप में करने का प्रावधान जोड़ता है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है, जिसने UCC लागू किया है। इसे 27 जनवरी, 2025 को लागू किया गया था।

UCC लागू होने की आज पहली सालगिरह

अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने की पहली सालगिरह मंगलवार को ‘UCC दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी। UCC राज्य में 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून में UCC दिवस के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में आज शामिल होंगे।

राज्य के गृह सचिव शैलेश बगोली, पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती और देहरादून के जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और तैयारियों की समीक्षा की। निरीक्षण के बाद गृह सचिव ने कहा कि उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य है जिसने UCC लागू किया है। उन्होंने कहा कि UCC के लागू होने से सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित हुए हैं और राज्य में एकरूपता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है।

अध्यादेश में क्या-क्या है?

इस बदलाव में सरकार ने उन लोगों के लिए सजा बढ़ाकर सात साल तक कर दी, जो शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं। साथ ही जो लोग जबरन, दबाव या धोखे से रिलेशनशिप में आते हैं, उनके लिए भी ऐसी ही सजा को सख्ती से लागू करने का प्रावधान है। इस अध्यादेश में एक नई धारा 390-A को भी जोड़ा गया है। रजिस्ट्रार जनरल को सेक्शन 12 के तहत शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप या विरासत से जुड़े रजिस्ट्रेशन रद्द करने की शक्तियां दी गई हैं।

राज्य में 2018 में पहले से ही धर्मांतरण विरोधी कानून लागू था, लेकिन सरकार ने 2022 में और फिर 2025 में इसमें संशोधन किया। इस बार जबरन धर्मांतरण के दोषी पाए जाने वाले लोगों के लिए तीन साल से लेकर उम्रकैद तक की जेल की सजा का प्रस्ताव रखा गया। पहले जबरन धर्मांतरण के लिए अधिकतम जेल की सज़ा 10 साल थी।

Tags: uccUCC 1st anniversaryUttarakhand News
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