हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन फुलेरा दूज (Phulera Dooj) का त्योहार मनाया जाता है। ये पर्व और दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम को समर्पित किया गया है। विशेषकर फुलेरा दूज मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज क्षेत्र में बड़े हर्षो उल्लास के साथ मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है। घर में सुख-समृद्धि रहती है।
फुलेरा दूज (Phulera Dooj) के दिन भक्ति भाव से राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत भी किया जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में फुलेरा दूज की पूजा और व्रत के नियम बताए गए हैं। साथ ही इस दिन कुछ गलतियों से बचने के लिए भी कहा गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन किन गलतियों से बचना चाहिए?
कब है फुलेरा दूज (Phulera Dooj)?
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत आज शाम 4 बजकर 57 मिनट पर हो चुकी है। तिथि की समाप्ति 19 फरवरी को शाम 3 बजकर 58 मिनट पर होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल फुलेरा दूज कल यानी 19 फरवरी को मनाई जाएगी।
फुलेरा दूज (Phulera Dooj) पर न करें ये गलतियां
– शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, फुलेरा दूज के दिन काले रंग के कपड़े न पहनें
– इस दिन किसी को भी कटु वचन या अभद्र भाषा न बोलें।
– घर या बाहर वाद-विवाद न करें। महिलाओं, बुजुर्गों और असहाय लोगों को अपमानित न करें।
– इस दिन तामसिक चीजों जैसे- मांस मदिरा, प्याज, लहसुन आदि का सेवन न करें।
– इस दिन झूठ भूलकर भी न बोलें।
फुलेरा दूज (Phulera Dooj) पर ये काम करना है शुभ
फुलेरा दूज (Phulera Dooj) के दिन सुबह प्रात: काल शुद्ध जल से नहाएं। फिर उगते सूरज को जल चढ़ाएं। शुभ मुहूर्त में राधा-कृष्ण का श्रृंगार करके उनकी पूजा करें। उनको फूल चढाएं। उन पर फूलों की बारिश करें। राधा-कृष्ण को गुलाल अर्पित करें। भगवान को माखन-मिश्री, ताजे फल और मिठाई का भोग अर्पित करें। अन्न , धन और वस्त्रों का दान करें। इस दिन दान बड़ा फलदायी माना गया है।









