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नई शिक्षा नीति के समस्त प्रावधानों को अमल में लाना बड़ी चुनौती : आर्य

Desk by Desk
22/08/2020
in Main Slider, ख़ास खबर, राजनीति, राष्ट्रीय, शिक्षा, हरयाणा
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राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य

राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य

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चंडीगढ़। हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने शिक्षाविदों को आशवस्त किया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अनुसंधान, अन्वेंषण तथा जीविकोपार्जन से सम्बन्धित अध्ययन कार्य को गति देने के लिए धन की कमी आड़े नहीं आएगी अलबत्ता इस नीति में किये गये समस्त प्रावधानों को अमल में लाना एक बड़ी चुनौती हाेगी।

श्री आर्य शुक्रवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राजभवन में आयोजित चार दिवसीय डिजिटल काॅन्क्लेव के समापन अवसर पर अपने सम्बोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में पहले से ही सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत हिस्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए तय किया गया है तथा ऐसा देश में पहली बार हुआ है। इस कार्यक्रम में अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति और शिक्षाविद उपस्थित थे। शेष विश्वविद्यलायों और शिक्षण संस्थाओं के कुलपति और पदाधिकारियों ने वीडियो काॅन्फ्रैंस से हिस्सा लिया। इस मौके पर हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष बी.के. कुठियाला ने चार दिन तक चली डिजिटल काॅन्क्लेव के निष्कर्ष पर अपनी प्रस्तुति दी।

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राज्यपाल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सामाजिक रूप से दबे-कुचले लोगों की शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों को पूरी तरह अम्ल में लाना बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए निजी संस्थानों के साथ बेहतर सामंजस्य करने की जरूरत है। नई शिक्षा नीति के मानदंडों को अपनाते हुए यदि गरीब लोगों के लिए शिक्षा के सामान अवसर जुटा पाए तो यह देश के लिए गौरव की बात होगी। उन्होंने समान शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा तंत्र में शहरी और ग्रामीण शिक्षा की खाई को मिटाना होगा जिससे सभी को शिक्षा के सामान अवसर मिल पाएगें। देश में सामान शिक्षा होगी तो वर्णविहीन समाज होगा और नवभारत का निर्माण होगा।

उन्होनें कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल, रोजगार, तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता को प्राथमिकता दी गई है। इन्हीं पैमानों पर खरा उतरने के लिए विश्वविद्यालयों को उद्योगों से जुड़ना होगा ताकि दोनों संस्थाएं आपस में तालमेल कर डिप्लोमा, डिग्री, व्यवसायी कोर्स कराकर युवाओं को रोचक विषयों और कार्यों में पारंगत कर सकें। देश में लोककलाओं और प्रादेशिक भाषाओं का खजाना है। उच्च शिक्षा स्तर पर प्राचीन लोक-कलाओं पर अनुसंधान कार्य करना होगा जिससे युवा इन्हें कैरियर के रूप में अपनाकर अध्ययन कर पाएंगेे।

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श्री आर्य ने कहा कि हरियाणा पहला राज्य है जहां नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पहली बार चार दिवसीय डिजिटल काॅन्क्लेव आयोजित की गई और शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रभावी विचार मंथन किया गया। उन्होनें आशा जताई की पिछले चार दिनों में जिन-जिन बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा के बाद जो निष्कर्ष सामने आएं हैं उन्हें मद्देनजर रखते हुए सभी निष्ठा और इच्छा शक्ति के साथ नई शिक्षा नीति लागू करेगें। इससे राष्ट्र के नव निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान होगा।

इस अवसर पर राज्यपाल की सचिव डा0 जी. अनुपमा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में आगंनवाड़ी केंद्रों को शिक्षा का बिंदु माना गया है। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए अध्यापकों को विशेष प्रशिक्षण दिए जाने का सुझाव दिया जिससे प्रशिक्षित अध्यापक महिला एवं बाल विकास के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दें सकें। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक सांझा माॅडल अधिनियम तैयार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होनें नई शिक्षा नीति के अनुसार बच्चों के सर्वांगीण और संतुलित मानसिक विकास के लिए कलात्मक शिक्षा पर अधिका कार्य करने की आशा जताई।

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श्री कुठियाला ने अपने सम्बोधन में कहा कि कॉन्क्लेव में 250 से अधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्रचार्यों, मुख्याध्यापकों और अन्य शिक्षाविदों ने अपने सुझाव दिए हैं और परिषद अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की कार्य योजना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति की खास बात यह है कि पढ़ने-पढ़ाने के साथ सीखना और सीखाना है। विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और अध्यापकों को भी सत्त प्रशिक्षण लेना होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके मार्गदर्शन में नई शिक्षा नीति को लागू करने में हरियाणा को देश का पहला राज्य बनाया जाए।

इस अवसर पर गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो0 टंकेश्वर कुमार, राज्यपाल के सलाहकार अखिलेश कुमार, चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राज कुमार मित्तल, दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल के कुलपति प्रो0 राजेंद्र कुमार अनायत, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी के अध्यक्ष डा0 जगबीर सिंह, एस.सी.आर.टी के निदेशक डा0 ऋषि गोयल, पंडित चिरंजीवी लाल शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्या डा0 रेखा शर्मा, मारकंडेय नेशनल काॅलेज, शाहबाद के प्राचार्य डा0 अशोक चौधरी, हिंदू काॅलेज , रोहतक के प्राचार्य डा0 विजय कुमार, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिवानी के एसोसिएट प्रोफेसर अजित सिंह के अलावा हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सलाहकार केवल कृष्ण भी उपस्थित थे।

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