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14 साल बाद गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर भारतीय श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान रवाना

A group left for Pakistan on the martyrdom day of Guru Arjan Dev Ji.

A group left for Pakistan on the martyrdom day of Guru Arjan Dev Ji.

सिखों के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी (Guru Arjan Dev ) के शहीदी दिवस के पवित्र अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की अगुवाई में भारतीय सिख श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन के लिए रवाना हो गया है। भारत-पाकिस्तान की अटारी-वाघा संयुक्त जांच चौकी (Border) पर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा गया, जहां ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी जयकारों के बीच जत्थे ने सीमा पार कर पाकिस्तान में प्रवेश किया। इस बार पाकिस्तान सरकार ने कुल 737 सिख श्रद्धालुओं को वीजा जारी किया है, जिसमें एसजीपीसी द्वारा भेजे गए 561 पासपोर्टों में से 541 श्रद्धालुओं को वीजा मिला है, जबकि सुरक्षा या अन्य तकनीकी कारणों से 20 लोगों की वीजा अर्जी मंजूर नहीं हो सकी।

यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि पूरे 14 साल के लंबे अंतराल के बाद भारतीय सिख श्रद्धालु इस विशेष अवसर पर पाकिस्तान जा रहे हैं। दरअसल, पिछले कई वर्षों से भारत और पाकिस्तान के गुरुद्वारा प्रबंधक संस्थानों के बीच नानकशाही कैलेंडर की तारीखों को लेकर वैचारिक मतभेद चल रहा था; पाकिस्तान आज भी पुराने नानकशाही कैलेंडर के अनुसार गुरुपर्व मनाता है, जबकि भारत में नए संशोधित कैलेंडर के आधार पर धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। तारीखों के इसी अंतर के कारण यह संयुक्त यात्रा संभव नहीं हो पा रही थी, लेकिन इस बार दोनों देशों के शीर्ष गुरुद्वारा संस्थानों ने आपसी सहमति और सूझबूझ दिखाते हुए कार्यक्रमों को सुविधानुसार आयोजित करने का बड़ा फैसला लिया, जिसके बाद इस यात्रा का मार्ग प्रशस्त हो सका।

धर्म प्रचार कमेटी के सचिव गुरिंदर सिंह मथरेवाल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे जत्थे का नेतृत्व मुख्य जत्थेदार भूपिंदर सिंह भलवान कर रहे हैं, जबकि गुरमीत सिंह बाहू को उप-अगुआ (डिप्टी लीडर) नियुक्त किया गया है। पाकिस्तान पहुंचने के बाद यह जत्था सबसे पहले सिखों के पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के पावन जन्म स्थान ‘गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब’ पहुंचेगा, जहां से 11 जून को श्रद्धालु गुरुद्वारा सच्चा सौदा साहिब (फारूकाबाद) के लिए प्रस्थान करेंगे। इसके बाद 12 जून को जत्था ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब (हसन अब्दाल) के दर्शन के लिए जाएगा और वहां दो दिन रुकने के बाद 14 जून को गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब (करतारपुर) पहुंचेगा।

यात्रा के अंतिम चरण में, 15 जून को सभी श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री रोड़ी साहिब के दर्शन करने के उपरांत लाहौर स्थित गुरुद्वारा श्री डेरा साहिब पहुंचेंगे। यहां 16 जून को श्री गुरु अर्जन देव जी ( Guru Arjan Dev) के शहीदी समागम के पावन संबंध में ‘श्री अखंड पाठ साहिब’ का श्रद्धापूर्वक आरंभ किया जाएगा। इसके बाद 18 जून को मुख्य शहीदी समागम आयोजित होगा, जिसमें सभी भारतीय श्रद्धालु शामिल होकर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धांजलि और अरदास अर्पित करेंगे। संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों और गुरुद्वारों के दर्शन के बाद 19 जून को यह जत्था वापस वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आएगा।

इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक खुशी के साथ-साथ एक भावुक माहौल भी देखने को मिल रहा है। जत्थे में कई ऐसे बुजुर्ग और परिवार शामिल हैं, जिनके पूर्वज विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे और उनके पैतृक घर व गांव आज भी सीमा पार मौजूद हैं। मोगा से पहली बार इस यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु मेजर सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके परिवार के लिए यह जीवन का सबसे अनमोल क्षण है। वहीं, लेखक एवं समाजसेवी लखविंदर सिंह लखा सलेमपुरी ने भावुक होते हुए कहा कि वे वर्षों से रोजाना अपनी अरदास में जिन ऐतिहासिक गुरुधामों से बिछड़ने का दुख प्रकट करते थे और दर्शन की कामना करते थे, आज वाहेगुरु की कृपा से उन्हें वह पावन अवसर मिल गया है।

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