तिरुपुर में एक शख्स और उसकी पत्नी को कोर्ट ने तीन साल की दी सजा

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तिरुपुर। तिरुपुर के जीवन बीमा एजेंट वी गुनसेकरन के बैंक अकाउंट में जब साल 2012 में 40 लाख रुपये गलती से आ गए, तो उन्होंने यह जानने की कोशिश नहीं की कि यह हुआ कैसे। किसी और के रुपयों से उन्होंने और पत्नी राधा ने प्रॉपर्टी खरीद डाली और बेटी की शादी तक कर डाली। हालांकि, आखिरकार अब जब कानून का शिकंजा उनके ऊपर कसा है तो उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी। एक कोर्ट ने सोमवार को उन्हें तीन साल जेल की सजा सुनाई है।

लोक निर्माण विभाग का फंड
दरअसल, सांसद और विधायक निधि के तहत लोक निर्माण विभाग को ये पैसे दिए जाने थे लेकिन अधिकारियों ने गलती से डिमांड ड्राफ्ट पर अधिशासी अभियंता की जगह गुनसेकरन का अकाउंट नंबर दे दिया। दोनों का अकाउंट तिरुपुर में कॉर्पोरेशन बैंक की मेन ब्रांच में था। पैसे ट्रांसफर होने के आठ महीने बाद जब अधिकारियों को एहसास हुआ कि पैसे अकाउंट में आए नहीं, तो उन्होंने बैंक से सवाल किया। वहां उन्हें पता चला कि डिमांड ड्राफ्ट पर जो अकाउंट नंबर लिखा था उसमें पैसे ट्रांसफर किए जा चुके हैं।

नहीं पूरा किया पैसे चुकाने का वादा
जब बैंक अधिकारियों ने गुरसेकरन का अकाउंट चेक किया तो पाया कि पैसे ट्रांसफर होने के कुछ ही दिन के अंदर उन्होंने खर्च कर डाले थे। बैंक के सीनियर अधिकारियों ने गुरसेकरन से पैसे वापस करने को कहा लेकिन वह नहीं कर सके। इसके बाद 2015 में असिस्टेंट जनरल मैनेजर नरसिम्हा गिरि ने शहर की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में गुरसेकरन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

कोर्ट में साबित गबन
क्राइम ब्रांच ने उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ धारा 403 (संपत्ति के गबन) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज किया। दंपति ने अग्रिम जमानत ले ली। इस बारे में अभियोजन पक्ष के वकील इब्राहिम राजा ने बताया कि गुरसेकरन ने ऐसा लिखकर दिया कि वह बैंक को कैश वापस करेंगे लेकिन कई बार आग्रह करने के बाद भी उन्होंने ऐसा किया नहीं। इसलिए, यह मामला गबन का माना गया। अभियोजन ने यह साबित कर दिया जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें तीन साल जेल की सजा दी। क्राइम ब्रांच ने दोनों को गिरफ्तार कर कोयंबटूर जिला जेल भेज दिया।

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