प्याज-टमाटर के बाद अब आलू की मार, इन वजहों से आसमान छू सकते हैं भाव

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आलू की मार
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नई दिल्ली। देशवासियों को एक बार फिर महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है। प्याज-टमाटर के आसमान छूती कीमतों के बाद अब आलू पर भी मंहगाई की मार पद सकती है। कई राज्यों में भारी बारिश के बाद प्याज-टमाटर की सप्लाई बाधित हुई है। जिससे दिल्ली में प्याज 60 रुपये किलो बिक रहा है और टमाटर के दाम बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं। हालांकि, पिछले सप्ताह की तुलना में प्याज की दरों में गिरावट आई है। इसी प्राकर से भारी बारिश और जलभराव के बाद आलू की बुवाई में एक महीने की देरी हो चुकी है। जिससे आलू की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी की संभावनाएं हैं।

एक होलसेल व्यापारी ने समाचार एजेंसी को बताया कि भारी बारिश और बाढ़ के कारण टमाटर की सप्लाई प्रभावित हुई है। इस वजह से पिछले कुछ दिनों से टमाटर के दाम बढ़ गए है। उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों जैसे कर्नाटक और तेलंगाना भारी बारिश और बाढ़ के गवाह हैं, इन राज्यों में सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई।  सरकारी डाटा के अनुसार, अन्य शहरों में भी टमाटर के दाम में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। बुधवार को दुकानदारों ने कोलकाता में टमाटर 60 रुपये किलो, मुंबई में 54 रुपये किलो और चेन्नई में 40 रुपये किलो तक बेचा।

वहीँ आलू की बात करें तो उपभोक्ताओं को अब जल्दी ही आलू भी परेशान कर सकता है। सामान्य से अधिक बारिश होने से आलू किसानों के साथ उपभोक्ताओं की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। बारिश की वजह से आलू की बोआई में लगभग एक महीने की देरी हो चुकी है। इससे बाजार में नया आलू के पहुंचने में देरी होना तय है। इसके चलते उत्पादक बाजारों में ही पुराने आलू में महंगाई का रुख बनने लगा है।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा होता है आलू का उत्पादन

आलू का सबसे ज्यादा उत्पादन उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में होता है। लेकिन, इस बार देश के सभी राज्यों में आलू की बोआई देर से हो रही है। अगैती आलू जो सितंबर के पहले सप्ताह में होती रही है, उसकी बोआई कहीं अक्टूबर के आखिरी सप्ताह अथवा नवंबर के पहले सप्ताह में हो सकती है। फर्रुखाबाद आस पास आलू की खेती वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। यहां के आलू के बड़े किसानों का कहना है कि इस बार बारिश के चलते बोआई नहीं हो पाई है।

अगैती आलू बुआई के बाद 60 दिनों में खुदाई लायक हो जाता है। बाजार को देखकर किसान इससे अच्छा पैसा कमा लेता है। लेकिन एक महीने के करीब देरी के कारण बाजार के जिंस खिलाड़ी सक्रिय हो गये हैं। बाजार में आलू का मूल्य 100 से डेढ़ सौ रुपये प्रति 50 किग्रा बढ़ाकर बोला जा रहा है। उत्पादक मंडियों में आलू 300 से 450 रुपये प्रति 50 किग्रा बिक रहा है, जो दिल्ली पहुंचकर 25 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय के मूल्य निगरानी सेल की साइट पर आलू समेत अन्य जिंसों के रोजाना के भाव दर्ज हैं।

आलू विशेषज्ञ व कारोबार पर नजर रखने वाले सुशील कटियार का कहना है कि इस बार आलू 15 दिसंबर से पहले बाज़ार में नहीं आ पायेगा। पंजाब से थोड़ा नया आलू 15 नवंबर तक बाजार में आ सकता है, लेकिन इस बार वहां भी अगैती आलू का रकबा बहुत कम है।

कोल्ड स्टोर में फिलहाल पिछले साल के कुल उत्पादन का 35 फीसद फीसद आलू है। इसमें से 20 फीसद से अधिक आलू बोआई में बीज में चला जाएगा। जबकि अगले 60 से 70 दिनों के लिए आलू की जरूरत को पूरा करने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है। पुराने आलू के साथ बाजार में उतरने वाले नये आलू के भाव चढ़ सकते हैं।

कृषि मंत्रालय के हार्टिकल्चर फसलों के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2018-19 के दौरान आलू की कुल पैदावार 5.30 करोड़ टन थी। कोल्ड स्टोर से निकासी आंकड़ों के मुताबिक मई में साढ़े छह फीसद, जून में 9.5 फीसद, जुलाई में 13.5 फीसद और अगस्त में 16 फीसद आलू की निकासी हुई है। जबकि अक्तूबर में अब तक 15 फीसद आलू कोल्ड स्टोर से निकला जा चुका है। इस बचे आलू के स्टॉक से बोआई के लिए बीज के रुप में बहुत ज्यादा आलू की खपत होती है। कोल्ड स्टोर में पड़े शेष आलू की मात्रा और घरेलू मांग में अंतर बढ़ सकता है। इसी को भांपकर बाजार में आलू अपना रंग दिखा सकता है।

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