ट्रिपल तलाक के बाद अब ‘ हलाला ‘ की बारी, खत्म हो कुप्रथा : वसीम रिजवी

हलाला
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लखनऊ। केंद्र की मोदी सरकार मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक को खत्म करने की कोशिशों में जुटी है। तो वहीं अब शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाली हलाला प्रथा के खिलाफ सवाल उठा दिया है। इसे खत्म किए जाने की मांग की है।

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महिलाओं के शारीरिक शोषण के लिए किया जाता है हलाला प्रथा का इस्तेमाल

वसीम रिजवी ने इस प्रथा के खिलाफ आवाज मुखर करते हुए कहा कि  इस  प्रथा का इस्तेमाल महिलाओं के शारीरिक शोषण के लिए किया जाता है। कुरान और इस्लाम के मुताबिक हलाला उस महिला के साथ किया जाना चाहिए। जिसे इस्लाम के हिसाब से तीन बार तलाक देकर अलग कर दिया गया हो और उससे फिर निकाह की मंशा न हो, लेकिन लोग महज शारीरिक शोषण करने के लिए तलाक देते हैं। इसके बाद फिर हलाला में दूसरे के साथ निकाह करवा कर कुछ दिन बाद तलाक करवा खुद निकाह कर लेते हैं जो कि सरासर गलत है। उन्होंने कहा  कि इस्लाम के मुताबिक जिससे तलाक की नीयत के साथ निकाह किया जाए वो निकाह ही हराम है।  ऐसे में जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वो इस्लाम की अपनी सहूलियत के हिसाब से इस्तेमाल करते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट में  याचिका  दायर,बहुविवाह और निकाह हलाला की परंपराओं को ‘असंवैधानिक’ घोषित हो

सुप्रीम कोर्ट में  याचिका  दायर कर मांग की गई है कि मुस्लिमों में बहुविवाह और निकाह हलाला की परंपराओं को ‘असंवैधानिक’ और महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए। ताजा याचिका में आरोप लगाया गया कि बहुविवाह और निकाह हलाला की परंपराएं संविधान के तहत मुस्लिम महिलाओं को मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।

बहुविवाह और निकाह  हलाला पर पाबंदी समय की मांग

दिल्ली भाजपा के नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि बहुविवाह और निकाल हलाला की परंपरा अनुच्छेद-14 विधि के समक्ष समानता, (15) धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक और (21) (जीवन जीने का अधिकार) तथा लोक व्यवस्था, नैतिकता एवं स्वास्थ्य के तहत दिये गये मौलिक अधिकार के लिए नुकसानदेह है। याचिका में दावा किया गया कि मौलिक अधिकार प्रदान करने के लिए बहुविवाह और निकाह  हलाला पर पाबंदी समय की मांग है।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि हलाला और बहु विवाह मुद्दे को वह बाद में सुनेगा, लेकिन कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया और हलाला, बहुविवाह पर सुनवाई नहीं हो पाई।

भारत में हिंदू और मुसलमान दोनों  धर्मनिरपेक्ष, नहीं पैदा होंगे सीरिया जैसे हालात पैदा

इससे पहले अयोध्या मसले पर आपसी समाधान नहीं होने की सूरत में ‘ऑर्ट ऑफ लिविंग’ के प्रमुख श्री श्री रविशंकर ने भारत में सीरिया जैसे हालात पैदा होने की बात कही थी। जिस पर सैयद वसीम रिजवी ने जवाब दिया कि भारत में सीरिया जैसी स्थिति पैदा नहीं हो सकती, क्योंकि यहां के हिंदू और मुसलमान दोनों ही धर्मनिरपेक्ष हैं।  उन्होंने कहा कि यहां हिंदू और मुसलमानों के बीच थोड़ी दरारें हैं, लेकिन अगर ये मामले जल्द नहीं सुधरे , तो ये दरारें खाई भी बन सकती हैं।

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