वीवीआईपी हेलिकाप्टर घोटाले के आरोपी गौतम खेतान के मामले में चल रही सुनवाई, वकील को लगाई फटकार

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  • सुप्रीम कोर्ट ने वीवीआईपी हेलिकाप्टर घोटाले के आरोपी गौतम खेतान के मामले में चल रही सुनवाई पर उनके वकील को फटकार लगाई
  • जवाब दाखिल करने के लिए एक महीने का वक्त मांगने पर कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि न्याय खरीदा नहीं जा सकता
  • वकील ने माफी मांगते हुए कहा कि मैं तो सिर्फ यही अनुरोध कर रहा था कि कोर्ट जवाब दाखिल करने के लिए जो भी उचित हो समय दे।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वीवीआईपी हेलिकाप्टर घोटाले के आरोपी गौतम खेतान के काला धन कानून से संबंधित मामले में बुधवार को नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘न्याय खरीदा नहीं जा सकता है।’ दरअसल, गौतम खेतान के वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र की अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। शीर्ष अदालत ने मई महीने में हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसने आयकर विभाग को खेतान के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया था। खेतान के खिलाफ काला धन कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हाई कोर्ट ने 16 मई को अपने आदेश में कहा था कि 2016 के काला धन कानून को जुलाई, 2015 से लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा था कि वह इस मामले पर सुनवाई करेगा।

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने कहा कि यह मामले को लंबा खींचने और इसकी सुनवाई कर रही पीठ से बचने का तरीका है। पीठ ने खेतान के वकील से कहा, ‘आपके जो प्रयास हैं उसे हम समझते हैं। हम इसके खिलाफ हैं। इस बारे में कुछ मत बोलिए। हम बेहद नाराज हैं। यह तरीका नहीं है। आप पीठ से बचना चाहते हैं। न्याय में इस तरह से विलंब नहीं किया जा सकता । इस तरह की निरर्थक बात नहीं करें। न्याय को इस तरह से नहीं खरीदा जा सकता।’

केंद्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी सवाल जुड़ा है। पीठ ने जब यह कहा कि वह इस मामले में 17 सितंबर को सुनवाई करेगी तो खेतान के वकील ने कहा, ‘हम अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का वक्त चाहते हैं। हमें जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का वक्त दिया जाए।’ खेतान के वकील की इस दलील से पीठ बेहद नाराज हो गई और उसने कहा, ‘नहीं, इस तरह नहीं। हम इस तरह के काम की निंदा करते हैं। न्यायालय में आचरण का यह तरीका नहीं है। इस न्यायालय में यह क्या हो रहा है? इस तरह नहीं। यह सब खुले न्यायालय में नहीं होना चाहिए। आप बहुत आपत्तिजनक कर रहे हैं।’

पीठ ने आगे कहा, ‘आप लोग वकील हैं ओर आपको कानून की रक्षा करनी चाहिए। जिस तरह से आपने आचरण किया है वह उचित नहीं है।’ हालांकि, खेतान के वकील ने पीठ से इसके लिये क्षमा याचना की और कहा, ‘मैं तो सिर्फ यही अनुरोध कर रहा था कि कोर्ट जवाब दाखिल करने के लिए जो भी उचित हो समय दे।’ पीठ ने वकील से कहा कि वह 17 सितंबर तक जवाब दाखिल करें और इस मामले को पीठ ने 18 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट का आदेश अनुचित लगता है।

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