अमित शाह की बिहार यात्रा पर टिकी विपक्ष निगाहें, दौरे से तय होगा गठबंधन का भविष्य

अमित शाह
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पटना। बिहार में वर्ष 2015  में हुए विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की गुरुवार पहली बिहार यात्रा है। हालांकि तब और आज के समय में काफी बदलाव आ गया है। उस समय जद (यू) भाजपा से अलग महागठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन अब भाजपा के साथ सरकार में है।

12 जुलाई बना बिहार की राजनीति के लिए अहम दिन

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को बिहार के राजधानी पटना पहुंचने वाले हैं। इस दौरान शाह और मुख्यमंत्री जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार से सुबह के नाश्ते और रात्रि भोज में उनकी मुलाकात तय है। इन दोनों नेताओं के मुलाकात को बिहार की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

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शाह के इस दौरे पर सत्ता पक्ष ही नहीं , बल्कि विपक्ष की पैनी निगाह

संभवना व्यक्त की जा रही है कि अमित शाह की बिहार यात्रा के दौरान न केवल नीतीश के जद (यू) से सीट बंटवारे पर चर्चा होगी बल्कि लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। ऐसे में अमित शाह के इस दौरे पर न केवल बिहार के सत्ता पक्ष के नेताओं की नजर है बल्कि विपक्ष भी इन नेताओं के मुलाकात पर पैनी निगाह रखे हुए है।

भाजपा नहीं मानती है, तो 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है जदयू

आगामी चुनावों को लेकर भाजपा और जद (यू) के नेता सीट बंटवारे और बड़े भाई-छोटे भाई की भूमिका को लेकर आमने-सामने आते रहे हैं। बयानबाजी के दौरान जदयू ने यहां तक कह दिया था कि पिछले लोकसभा चुनाव के फॉमूर्ले पर चलते हुए उन्हें 40 में से 25 सीट लड़ने के लिए मिलनी चाहिए। जदयू ने यह भी कह दिया है कि अगर भाजपा नहीं मानती है, तो वह 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

जदयू और भाजपा के बीच में बड़ा भाई बनने की होड़ का कोई सवाल ही नहीं

हालांकि नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि जदयू और भाजपा के बीच में बड़ा भाई बनने की होड़ का कोई सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा था कि दोनों दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर जो बयानबाजी हो रही थी। वह बेमतलब है और जब चुनाव की तारीख पास आएगी।  तो दोनों दलों के आला नेता बैठकर इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे और मामले का निपटारा कर लेंगे।

पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू को मात्र दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा

बतातें चलें कि पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी। उसे मात्र दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। जबकि भाजपा को बिहार की 40 में से 22 सीटें मिली थीं। वहीं, सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) को क्रमश: छह और तीन सीटें मिली थीं। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर रालोसपा ने भी अधिक सीट पर दावेदारी कर रखी है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि सीट बंटवारा कोई बड़ा मुद्दा नहीं

जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि सीट बंटवारा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल सभी दलों के जब दिल मिल गए हैं, तो सीट भी समय आने पर बंट जाएगा। इधर, विपक्ष भी शाह के दौरे पर पैनी नजर बनाए हुए है। गौरतलब है कि राजद रालोसपा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को कई मौके पर महागठबंधन में शामिल होने का न्योता दे चुका है।

राजग घटक दलों में सीट बंटवारे को लेकर संभावित झगड़े को लेकर राजद, कांग्रेस  नेता उत्साहित

राजग के घटक दलों में सीट बंटवारे को लेकर संभावित झगड़े को लेकर राजद, कांग्रेस के नेता उत्साहित हैं। राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भविष्यवाणी भी कर दी है कि लोजपा और रालोसपा दोनों महागठबंधन में शामिल होने वाले हैं। बातचीत हो चुकी है। हालांकि, रघुवंश के बयान को पासवान ने खारिज कर दिया था । ऐसे में तय है कि राजग में सीट बंटवारे के तय फॉमूर्ले से नाराज दल नए ठिकाने खोजेंगे।

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