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इंडोनेशिया में फिर भूकंप से दहशत, 7.7 के विनाशकारी झटके के बाद 3000 से ज्यादा आफ्टरशॉक

Indonesia Earthquake

Indonesia Earthquake

इंडोनेशिया: फ्लोरेस द्वीप पर प्रकृति का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। 15 अगस्त के विनाशकारी 7.7 तीव्रता के भूकंप (Earthquake) के बाद अब गुरुवार को 5.9 तीव्रता का एक और शक्तिशाली झटका दर्ज किया गया। भूकंप की गहराई महज 10 किलोमीटर बताई गई है, जिसके कारण सतह पर इसके झटके तेज महसूस किए जा सकते हैं।

EMSC और जर्मनी के GFZ रिसर्च सेंटर ने नए भूकंप की पुष्टि की है। इससे पहले 17 अगस्त को भी इसी क्षेत्र में 5.9 तीव्रता का आफ्टरशॉक आया था। लगातार आ रहे झटकों के बीच राहत और बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

एक हफ्ते में हजारों झटके, लोग दहशत में

इंडोनेशिया की भूकंप एजेंसी BMKG के अनुसार 19 अगस्त तक फ्लोरेस क्षेत्र में 3,000 से अधिक आफ्टरशॉक दर्ज किए जा चुके थे। इनमें दर्जनों झटके ऐसे थे जिन्हें स्थानीय लोगों ने महसूस किया।

एजेंसी के मुताबिक आफ्टरशॉक की यह गतिविधि अगले तीन से चार सप्ताह तक जारी रह सकती है। हालांकि समय के साथ झटकों की तीव्रता कम होने की उम्मीद है।

7.7 के भूकंप ने उजाड़ दिए कई इलाके

15 अगस्त का 7.7 तीव्रता वाला भूकंप फ्लोरेस बैक-आर्क थ्रस्ट फॉल्ट की गतिविधि से आया था। USGS के अनुसार इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी और केंद्र एंडे शहर से लगभग 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में समुद्र में स्थित था।

मुख्य भूकंप के बाद समुद्र में हलचल हुई और कुछ इलाकों में 1.61 मीटर तक ऊंची सुनामी लहरें दर्ज की गईं। सुनामी की चेतावनी के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया था।

70 से ज्यादा मौतें, हजारों लोग बेघर

भूकंप से कम से कम 70 से 73 लोगों की मौत हुई है, जबकि 1,100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। 17 अगस्त के आफ्टरशॉक में दो और मौतें होने की जानकारी सामने आई।

करीब 12 हजार घरों को नुकसान पहुंचा है। इनमें 900 से अधिक मकान पूरी तरह ढह गए। कई स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पूजा स्थल और सरकारी इमारतें भी प्रभावित हुई हैं।

भूस्खलन से सड़कें बंद, राहत अभियान जारी

भूकंप के बाद कई जगह भूस्खलन हुआ, जिससे सड़कें बाधित हो गईं। बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों और अस्थायी शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।

लगातार आने वाले उथले आफ्टरशॉक ने राहत टीमों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों के गिरने और नए भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और बचाव दल हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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