E-20 पेट्रोल नीति के विरोध में आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोमवार को प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने की कोशिश की। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) जैसे ही अपने समर्थकों के साथ आगे बढ़े, दिल्ली पुलिस ने उन्हें फिरोजशाह रोड पर रोक दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आतिशी समेत कई नेता वहीं धरने पर बैठ गए।
‘दो लाख लोगों की मांग लेकर आए हैं’
मार्च के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह दो लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर वाली याचिकाएं प्रधानमंत्री को सौंपना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ ऐसे करीब 100 लोग भी मौजूद हैं, जिनकी गाड़ियां E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से प्रभावित हुई हैं।
AAP की मांग है कि केंद्र सरकार या तो E-20 पेट्रोल की व्यवस्था वापस ले या इसकी कीमत 85 रुपये प्रति लीटर तय करे। पार्टी यह भी चाहती है कि वाहन चालकों को शुद्ध पेट्रोल और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में से अपनी पसंद का विकल्प दिया जाए।
वकीलों ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया
मार्च से पहले कई वकीलों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर प्रधानमंत्री आवास की ओर प्रस्तावित प्रदर्शन पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास देश के सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में शामिल है और वहां किसी भी तरह की सार्वजनिक भीड़ सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकती है।
ज्ञापन में जुलाई 2026 की उस घटना का भी उल्लेख किया गया, जब विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया था। वकीलों ने हाई-सिक्योरिटी जोन में प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है।
बीजेपी का पलटवार
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने केजरीवाल के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना अनुमति मार्च निकालना केवल टकराव पैदा करने की कोशिश है, ताकि बाद में सरकार पर आरोप लगाए जा सकें। उन्होंने कहा कि यह आम आदमी की समस्या से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास है।
फिलहाल पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी है, जबकि AAP नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।
