अटल बिहारी की हालत में सुधार, अभी कुछ दिन और रहेंगे अस्पताल में

अटल बिहारीअटल बिहारी

नई दिल्ली। बीते 11 जून से एम्स में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत में सुधार हो रहा है। बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उनका हाल चल जानने एम्स गये। इस दौरान शाम 4 बजे एम्स ने एक हेल्थ बुलेटिन जारी डॉक्टरों ने कहा कि अटल की हालत में पहले से काफी सुधार है। डाक्टरों ने उम्मीद जताई की अगले कुछ दिनों में अटल जी को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। डाक्टरों ने बताया की पूर्व पीएम की किडनी, हृदय गति, ब्लड प्रेशर सभी नॉर्मल है।

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अटल बिहारी को11 जून यूरिन में इंफेक्शन के कारण भर्ती कराया गया था अस्पताल में

बता दें की वाजपेयी जी को 11 जून को यूरिन में इंफेक्शन के चलते दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उनसे मिलने नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अमित शाह राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, विजय गोयल समेत कई केंद्रीय मंत्री पहुंचे थे। अटल बिहारी बाजपेयी बीते नौ साल बीमारी के कारण घर में ही कैद होकर रह गये है। गत 2015 में उनकी तस्वीर तब सामने आई थी तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए वाजपेयी को घर जाकर भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था। मालूम हो की 2009 में जब उनकी तबियत बिगड़ी तबसे वह दोबारा ठीक नहीं हुए और कुछ दिन बाद खबर आई की स्मृति लोप हो गया है वह न किसी को पहचानते है और न किसी से बोलते है।

1951 में जनसंघ की स्थापना के साथ ही शुरू किया था राजनीतिक सफर

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्मे बाजपेयी का राजनीतिक सफर 1951 में जनसंघ की स्थापना के साथ  शुरू हुआ था। 1975-77 के आपातकाल के दौरान वे गिरफ्तार किए गए। 1977 के बाद जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार में वे विदेश मंत्री भी रहे। 1980 में उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी। वाजपेयी सबसे पहले 1996 में 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने। बहुमत साबित नहीं कर पाने की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दूसरी बार वे 1998 में प्रधानमंत्री बने। सहयोगी पार्टियों के समर्थन वापस लेने की वजह से 13 महीने बाद 1999 में फिर आम चुनाव हुए। 13 अक्टूबर 1999 को वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इस बार उन्होंने 2004 तक अपना कार्यकाल पूरा किया।

2009 में रखा गया था वेंटिलेटर पर

2009 में वाजपेयी की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में दिक्कत के बाद कई दिन वेंटिलेटर पर रखा गया। हालांकि, बाद में वे ठीक हो गए और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बाद में कहा गया कि वाजपेयी लकवे के शिकार हैं। इस वजह से वे किसी से बोलते नहीं हैं। बाद में उन्हें स्मृति लोप भी हो गया। उन्होंने लोगों को पहचानना भी बंद कर दिया।

 

 

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