Site icon 24 GhanteOnline | News in Hindi | Latest हिंदी न्यूज़

साल 2025 में टॉप गियर में दौड़ा ऑटो सेक्टर, 5 के पंच ने दिलाई सुपरफास्ट स्पीड

साल 2025 में ऑटो सेक्टर को मिला बूस्टर डोज, 5 के पंच ने दिलाई सुपरफास्ट स्पीड

कई सालों की लगातार बढ़त के बाद साल 2025 भारतीय ऑटो इंडस्ट्री (Auto Industry) के लिए रोमांचकारी साबित हुआ. साल की शुरुआत में तो कंपनियों को

मांग में सुस्ती का सामना करना पड़ा, लेकिन साल खत्म होते-होते बिक्री में कई रिकॉर्ड बन गए. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के समय-समय पर आए आंकड़ों से पता चला कि पैसेंजर वाहनों की बिक्री ऊंचे स्तर पर जाकर लगभग स्थिर हो गई थी.

यह कमजोरी कई महीनों तक बनी रही. जुलाई में पैसेंजर वाहनों की डिस्पैच पिछले साल से थोड़ी कम रही और जून तिमाही में बिक्री घटी, जिससे चार साल की लगातार ग्रोथ का सिलसिला टूट गया. हालांकि, गिरावट का सिलसिला ज्यादा नहीं चला और सितंबर से इंडस्ट्री ने फिर से रफ्तार पकड़ी और बिक्री के कई रिकॉर्ड बनाए. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऑटो इंडस्ट्री (Auto Industry)  के फेवर में 5 चीजें हुईं.

1. 15 अगस्त ने बदली दिशा

लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी ढांचे में बदलाव का ऐलान किया. यह ऐसा कदम था, जिससे ऑटो इंडस्ट्री (Auto Industry)  की पूरी लागत संरचना बदलने वाली थी. कई महीनों से ठहराव और अनिश्चितता झेल रही इंडस्ट्री के लिए यह घोषणा कहानी में बड़ा मोड़ साबित हुई.

2. सितंबर से असली बदलाव

3 सितंबर को जीएसटी काउंसिल ने ऑटोमोबाइल पर टैक्स में बदलाव को मंजूरी दी. इससे गाड़ियों की कीमतें कम हुईं और लंबे समय से रुकी मांग के फिर से बढ़ने का रास्ता साफ हुआ. बदलाव लागू होने से पहले के हफ्तों में बिक्री धीमी रही, लेकिन कंपनियों और डीलरों ने आगे की तेजी को देखते हुए प्रोडक्शन, कीमत और स्टॉक की योजना बनानी शुरू कर दी.

3. GST 2.0 ने बदली बाजार की तस्वीर

सितंबर में जमीन पर इसका असर साफ दिखा. नए टैक्स लागू होने से पहले खरीदारों ने गाड़ी खरीदना टाल दिया. यह समय त्योहारों की शुरुआत का भी था. लेकिन यह सुस्ती ज्यादा देर नहीं रही. 22 सितंबर, यानी नवरात्रि के पहले दिन और नए जीएसटी लागू होते ही मांग अचानक तेज़ हो गई, जिससे अनुभवी डीलर भी हैरान रह गए.

4. नवरात्रि से फुल स्पीड

नवरात्रि में दिल्ली, गुरुग्राम और मुंबई के शोरूम में उस दिन गाड़ियों की डिलीवरी आम दिनों से तीन से पांच गुना ज्यादा रही. छोटी कारों की मांग जबरदस्त है. छोटे शहरों और कस्बों में भी यही हाल रहा, जहां दोपहिया और कार दोनों के लिए लोगों की भीड़ और पूछताछ बढ़ गई.

कार कंपनियों ने भी तेजी के संकेत देने शुरू कर दिए. मारुति सुजुकी को 18 सितंबर के बाद से 75,000 बुकिंग मिलीं, क्योंकि उसने जीएसटी कट के अलावा और भी ऑफर दिए. कंपनी के अधिकारी पार्थो बनर्जी ने कहा कि छोटी कारों की मांग करीब 50% बढ़ी है, हालांकि एसयूवी की कुल बुकिंग अब भी ज्यादा रही.

5. अक्तूबर में रिकॉर्ड टूटे

जो शुरुआत में सिर्फ त्योहारों की तेजी लग रही थी, वह जल्दी ही मजबूत रिकवरी में बदल गई. अक्टूबर इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक महीना बन गया. इस महीने करीब 40 लाख गाड़ियों की रिटेल बिक्री हुई, जिसमें कार और दोपहिया दोनों शामिल थे. FADA के आंकड़ों के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन साल-दर-साल 40.5% बढ़े.

Exit mobile version