अयोध्या राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 11 जुलाई को होगी सुनवाई

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लखनऊ। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी। इस मामले में एक हिंदू याचिकाकर्ता ने मध्यस्थता प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए कहा था कि इसका कोई परिणाम नहीं निकला है। उन्होंने इस मामले की फिर से सुनवाई करने की मांग की थी।

इस मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह 10:30 बजे से होगी। अयोध्या मामले पर सुनवाई के बाद यही संविधान पीठ कर्नाटक के बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई करेगी।

मध्यस्थता समिति को बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए और 15 अगस्त तक की मोहलत मिली है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने मार्च के पहले हफ्ते में मध्यस्थता कमेटी को सभी पक्षों के साथ बातचीत कर इस मसले का सर्वमान्य हल निकालने के लिए आठ हफ्ते दिए थे।

6 मई को ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई मोहलत पूरी हो गई थी। 6 मई को समय खत्म होने से पहले ही पैनल के कहने पर 15 अगस्त तक यह अवधि बढ़ा दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक फैजाबाद में सभी पक्षकारों के साथ समिति ने अलग-अलग बात की है। इस बाबत कोर्ट के निर्देशानुसार स्टेटस रिपोर्ट भी संविधान पीठ को सौंपी थी।

समिति की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस फाकिर मोहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला कर रहे हैं। बाकी अन्य सदस्यों में धर्मगुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू हैं। इस बीच मन्दिर पक्षकारों ने भी गैर विवादित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने की मंजूरी देने की याचिका लगाई है। मूल याचिकाकर्ताओं में से एक गोपाल सिंह विशारद ने मंगलवार को कोर्ट को बताया है कि मध्यस्थता के नाम पर कोई ठोस सफलता नहीं मिल रही है।

ऐसे में कोर्ट पैनल को भंग कर मूल मामले की सुनवाई शुरू कर दे। अब गुरुवार को इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी। इससे पहले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की अपील की गई थी। इस मामले के पक्षकारों में से एक गोपाल सिंह ने अपनी याचिका में दावा किया था कि मध्यस्थता से विवाद का समाधान होता नहीं दिख रहा है। मध्यस्थता का दौर भी ठप हो गया। ऐसे में इस मामले की जल्द सुनवाई शुरू की जाए।

राम मंदिर विवाद सुलाझने में दोनों पक्षों का साथ न आना बड़ी वजह है। हिंदू महासभा मध्यस्थता के खिलाफ है। निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए राजी है। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ही तय करे कि अयोध्या विवाद का निपटारा कैसे किया जाए।

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