दलित संगठनों ने खोला मोर्चा, एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ भारत बंद

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नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ दलित संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया है। इसका असर देश के हिंदी भाषी क्षेत्रों में ख़ास देखने को मिल रहा है। जिसमें कई राजनीतिक पार्टियां व संगठन भी समर्थन में आ गए हैं। प्रदर्शन कर रहे संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पहले की तरह लागू किया जाए। इस विरोध प्रदर्शन का असर सबसे ज्यादा पंजाब में पड़ने की संभावना है, जिसकी वजह से राज्य के सभी शिक्षण संस्थान, सार्वजनिक परिवहन को आज बंद रखा गया है। इस वजह से राज्य में आज होने वाले सीबीएसई के बोर्ड के पेपर रद्द कर दिए हैं।

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एससी-एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर भारत बंद

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के फैसले को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। बिहार के अररिया सीपीआईएमएल के कार्यकर्ताओं ने आरा ब्‍लॉक पर ट्रेन को रोका गया भारत बंद का पंजाब के अमृतसर में व्‍यापक असर देखने को मिल रहा है। यहां पर लगभग सभी जगह बाजार बंद हैं और अनहोनी की आशंका को देखते हुए सुरक्षाबल तैनात किये गये हैं। बता दें कि पंजाब की जनसंख्या में 32 फीसदी आबादी दलितों की है जो देश के किसी भी राज्य में सबसे ज़्यादा है। राज्य सरकार ने कहा है कि वो दलितों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने दलित समुदाय के नेताओं से आग्रह किया है कि वो अपने विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखें। पंजाब में बंद के चलते 4 हज़ार पुलिस के जवान, रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात की गई है। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि बंद के दौरान जो भी हिंसा करता नज़र आएगा उसके खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। मोबाइल इंटरनेट सेवा पर भी राज्य में आज के लिए रोक लगा दी है।

वहीं इस मामले में यूपी में बहराइच से बीजेपी सांसद सावित्री बाई ने भी अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस मामले में कांग्रेस प्रवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निश्चित तौर पर रिव्यू पिटिशन डाला जाना चाहिए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ठीक से पक्ष क्यों नहीं रखा, इसकी जांच होनी चाहिए।

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